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गुरुग्राम में एनबीसीसी ग्रीन व्यू के असुरक्षित टावरों को गिराने की मिली मंजूरी, सुरक्षा मानकों का करना होगा पालन

Chikheang 4 day(s) ago views 865
  

सेक्टर-37डी स्थित एनबीसीसी ग्रीन व्यू हाउसिंग प्रोजेक्ट। जागरण



संवाद सहयोगी, नया गुरुग्राम। सेक्टर-37डी स्थित एनबीसीसी ग्रीन व्यू हाउसिंग प्रोजेक्ट के शेष असुरक्षित टावरों और ढांचों को गिराने के लिए अब जिला प्रशासन से औपचारिक अनुमति मिल गई है। उपायुक्त गुरुग्राम ने टावर-ए, बी, सी और डी सहित आसपास के सभी संबंधित ढांचों को गिराने की मंजूरी जारी कर दी है।

सरकारी कंपनी एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड की ओर से सितंबर 2025 में भेजे गए आवेदन पर अतिरिक्त उपायुक्त की अध्यक्षता में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया था। इसमें उपस्थित और अनुपस्थित दोनों तरह के आवंटियों की राय को ध्यान में रखा गया। प्रशासन ने माना कि इमारतों की जर्जर स्थिति को देखते हुए डिमोलीशन में देरी करना जनहित के विरुद्ध होगा।

उपायुक्त अजय कुमार द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह अनुमति संबंधित सभी विभागों की गाइडलाइंस और सुरक्षा मानकों का पालन करने की शर्त पर दी गई है। डिमोलीशन से पहले और उसके दौरान हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, फायर विभाग, नगर निगम, श्रम विभाग, आपदा प्रबंधन सेल, पुलिस विभाग और इंडस्ट्रियल सेफ्टी एंड हेल्थ विभाग की शर्तों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि साइट पर किसी प्रकार की लापरवाही या दुर्घटना होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी एनबीसीसी की होगी। साथ ही, कंपनी को हर पखवाड़े संबंधित विभागों को अनुपालन रिपोर्ट भी सौंपनी होगी।

गौरतलब है कि एनबीसीसी ग्रीन व्यू प्रोजेक्ट को वर्ष 2022 में आईआईटी रुड़की और दिल्ली द्वारा कराए गए स्ट्रक्चरल ऑडिट के बाद रहने के लिए असुरक्षित घोषित किया गया था। इसके बाद जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आदेश पर सभी परिवारों को सोसायटी खाली कराई गई थी।

इस परियोजना में कुल 700 से अधिक फ्लैट थे, जिनमें से 255 फ्लैट्स बेचे गए थे। छह माह पहले तक 160 खरीदार रिफंड का विकल्प चुन चुके हैं, जबकि 78 ने पुनर्निर्माण पर सहमति दी है। 17 खरीदार अभी निर्णय की प्रक्रिया में हैं। ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अधिकांश आवंटियों ने पुनर्निर्माण को ही प्राथमिकता दी है।

एनबीसीसी प्रबंधन का कहना है कि सभी असुरक्षित इमारतों के गिरने के बाद ही पुनर्निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा। डीटीसीपी द्वारा परियोजना का लाइसेंस मई 2027 तक बढ़ाया जा चुका है। अनुमति मिलने के बाद अब चरणबद्ध तरीके से डिमोलीशन किया जाएगा जिससे बीते तीन वर्षों से अटके इस प्रोजेक्ट को नई दिशा मिल सकेगी।

  

  


उपायुक्त गुरुग्राम के दिशा निर्देशों के अनुसार एनबीसीसी कंपनी को शेष टावरो को गिराने के लिए विभिन्न नियम शर्तों के आधार पर परमिशन जारी कर दी गई हैं।


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- अमित मधोलिया, डीटीपीई, टाउन प्लानिंग
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