एम्स बठिंडा में हार्ट मरीजों के लिए बड़ी पहल, इमरजेंसी में 15 मिनट में मिलेगा इलाज (फोटो-जागरण)
साहिल गर्ग, बठिंडा। दिल के मरीजों को समय पर और त्वरित इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में एम्स बठिंडा ने एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। संस्थान में इमरजेंसी में आने वाले हार्ट मरीजों के लिए अलग से अत्याधुनिक हार्ट सेंटर की शुरुआत की गई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
इस सेंटर के माध्यम से हार्ट अटैक या अन्य गंभीर हृदय रोगों से पीड़ित मरीजों को महज 15 मिनट के भीतर प्राथमिक इलाज उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उनकी जान बचाने की संभावनाएं काफी बढ़ जाएंगी।
एम्स बठिंडा प्रशासन के अनुसार, इस हार्ट सेंटर में इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों का तुरंत चेकअप किया जाएगा। ईसीजी, ब्लड टेस्ट और अन्य आवश्यक जांचें बिना देरी के की जाएंगी। जांच के बाद यदि मरीज की स्थिति गंभीर पाई जाती है और स्टंट डालने की आवश्यकता होती है, तो उसे तुरंत आईसीयू में शिफ्ट कर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस पूरी व्यवस्था को इस तरह तैयार किया गया है कि इलाज में किसी भी तरह की देरी न हो। जबकि बीते एक महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस हार्ट सेंटर में अब तक 121 मरीजों के दिल का सफल इलाज किया जा चुका है। इनमें कई मरीज ऐसे भी थे, जो गंभीर हालत में एम्स बठिंडा पहुंचे थे।
समय पर इलाज मिलने के कारण उनकी स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। डाक्टरों का कहना है कि हार्ट अटैक के मामलों में गोल्डन आवर बेहद अहम होता है। अगर इस समय के भीतर सही इलाज मिल जाए, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है और दिल को होने वाले नुकसान को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। फिलहाल इस सेंटर को सात बेड से शुरू किया गया है।
यह हार्ट सेंटर एम्स बठिंडा के कार्यकारी निदेशक डॉ. रतन गुप्ता के विशेष प्रयासों से शुरू किया गया है। उन्होंने संस्थान में हृदय रोगों से संबंधित बढ़ते मामलों को देखते हुए इस सेंटर की आवश्यकता पर जोर दिया था। डॉ. गुप्ता का मानना है कि बठिंडा और आसपास के जिलों में बड़ी संख्या में हार्ट के मरीज आते हैं और उन्हें तुरंत इलाज की जरूरत होती है।
ऐसे में यह सेंटर न केवल एम्स बठिंडा, बल्कि पूरे मालवा क्षेत्र के लिए एक बड़ी सौगात साबित होगा। वहीं, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा. राजीव गुप्ता ने बताया कि इस हार्ट सेंटर का मुख्य उद्देश्य दिल के मरीजों को सही समय पर सही इलाज उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि इलाज में कुछ मिनटों की देरी भी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए यहां डाक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी टीम को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। एम्स बठिंडा के इस कदम से न केवल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में विश्वास बढ़ेगा, बल्कि निजी अस्पतालों पर निर्भरता भी कम होगी।
स्थानीय लोगों और आसपास के जिलों से आने वाले मरीजों के लिए यह हार्ट सेंटर जीवन रक्षक साबित हो रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तरह की सुविधाएं अन्य सरकारी अस्पतालों में भी विकसित की जाएं, तो हार्ट अटैक से होने वाली मौतों में बड़ी कमी लाई जा सकती है। |
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