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सोनपुर मेला 2025 में चमका पशु बाजार... 31 दिनों में 30 करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड तोड़ कारोबार, घोड़ा बाजार आकर्षक केंद्र

Chikheang 2025-12-10 18:37:36 views 1267
  

घोड़ा बाजार आकर्षक केंद्र



जागरण संवाददाता, हाजीपुर(वैशाली)। विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला 2025 इस वर्ष पशु व्यापार के मामले में बेहद सफल रहा। 9 नवंबर से 9 दिसंबर तक 31 दिनों की अवधि में मेला परिसर में कुल 30 करोड़ 14 लाख 16 हजार रुपये का पशु कारोबार दर्ज किया गया। यह आंकड़ा न सिर्फ पशुपालकों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है, बल्कि सोनपुर मेले की ऐतिहासिक पहचान को भी एक बार फिर मजबूत करता है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
घोड़ा बाजार बना मुख्य आकर्षण

प्रतिवेदन के अनुसार, इस बार भी घोड़ा बाजार मेला का केंद्र बिंदु साबित हुआ। मेला अवधि में कुल 2093 घोड़ों की बिक्री हुई, जिससे 29 करोड़ 44 लाख 56 हजार रुपये का कारोबार हुआ।

यह कुल पशु व्यापार का सबसे बड़ा हिस्सा है। 14 नवंबर को बाजार में सर्वाधिक 2060 घोड़ों की उपस्थिति दर्ज की गई।

वहीं 21 नवंबर को 11 लाख रुपये में एक घोड़ा बिका, जो इस वर्ष की सबसे ऊंची बिक्री रही। 16 नवंबर को 32 हजार रुपये में घोड़े की न्यूनतम बिक्री दर्ज हुई।
गाय, भैंस और बैल का सीमित लेकिन स्थिर कारोबार

घोड़ों के मुकाबले अन्य पशुओं की संख्या कम रही। मेला अवधि में 11 गायों की बिक्री से 10 लाख 30 हजार रुपये, और एक भैंस की बिक्री से 80 हजार रुपये का कारोबार हुआ।

पशुपालन विभाग के अनुसार, 19 नवंबर को गायों की उपस्थिति सर्वाधिक 17 रही, जबकि 8 नवंबर को भैंस बाजार में केवल दो भैंसें उपलब्ध थीं। 12 नवंबर को बैलों की उपस्थिति 10 से अधिक नहीं रही।
बकरी और कुत्ता बाजार ने भी खींचा ध्यान

सोनपुर मेले में बकरी बाजार और कुत्ता बाजार भी अच्छी बिक्री के कारण चर्चाओं में रहे। मेला अवधि में कुल 682 बकरियों की बिक्री से 50 लाख रुपये का कारोबार किया गया।

12 दिसंबर को बकरी बाजार में सर्वाधिक 625 बकरियों की उपस्थिति दर्ज की गई, जबकि 9 नवंबर को केवल 40 बकरियां पहुंची थीं।

कुत्ता बाजार में विभिन्न नस्लों के 171 कुत्ते बिके, जिनसे 8 लाख 50 हजार रुपये का अनुमानित कारोबार हुआ।

15 नवंबर को सर्वाधिक 450 कुत्तों की उपस्थिति दर्ज की गई, जबकि 10 नवंबर को यह संख्या घटकर 45 रह गई।
मेले में मांग और उपलब्धता में उतार-चढ़ाव


प्रतिवेदन में बताया गया है कि शुरुआती दिनों में कई बाजारों में कम संख्या में पशु पहुंचे। 9 नवंबर को चार घोड़े और दो गायें ही बाजार में उपस्थित थीं। लेकिन समय के साथ खरीदारों की संख्या बढ़ती गई और बाजार में रौनक लौट आई।

मेला प्रभारी डॉ. मुकेश सहाय द्वारा जारी आधिकारिक रिपोर्ट मेले की भव्यता और आर्थिक गतिविधियों की मजबूती को दर्शाती है। सोनपुर मेला एक बार फिर साबित कर गया कि यह न केवल सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि देश के सबसे बड़े पशु बाजारों में से एक भी है।
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