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मुजफ्फरपुर के रैन बसेरों में सुविधाओं की कमी; पानी-शौचालय का अभाव, गार्डों को वर्दी तक नहीं नसीब

cy520520 2025-12-10 11:06:27 views 542
  

स्टेशन रोड के आश्रय स्थल पर बैठा कर्मी। फोटो जागरण



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। रात्रि में जरूरतमंदों के विश्राम के लिए शहरी क्षेत्र आठ स्थानों पर निगम द्वारा संचालित आश्रय स्थलों पर सुविधा का टोटा दिखा। आश्रय स्थलों पर बिस्तर, बिजली, चादर एवं कंबल जैसी सुविधाएं उपलब्ध दिखी लेकिन अधिकांश जगह पानी एवं शौचालय की सुविधा नदार दिखी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

आश्रय स्थलों पर सस्ते दरों पर भोजन उपलब्ध कराने की सुविधा कागजी पाई गई। सभी जगह कर्मचारी तैनात दिखे लेकिन कहीं भी नाइट गार्ड वर्दी में नहीं दिखा। आश्रय स्थलों पर आश्रय लेने वाले दिखे लेकिन साफ- सफाई की कमी जरूर दिखी।

नगर निगम द्वारा बैरिया गोलम्बर, मालगोदाम चौक, जिला परिषद, कलमबाग चौक, आरडीएस कालेज, जेल चौक, जिला स्कूल एवं चन्दवारा पानी कल चौक के पर आश्रय स्थल संचालित किए जा रहे हैं। प्रत्येक अश्रय स्थल में 10 से 15 लोगों के लिए बेड उपलब्ध है। सोमवार को देर शाम दैनिक जागरण की टीम ने इस आश्रय स्थलों की पड़ताल की तो कई कमियां नजर आई।

जिला परिषद मार्केट स्थित रैन बसेरा दो दो लोग आश्रय लेते पाए गए। वहां नाइट गार्ड गणपत शाह एवं केयर टेकर शुभम सिंह तैनात मिले। लेकिन नाइट गार्ड वर्दी में नहीं था। केयर टेकर ने बताया कि यहां पानी की सुविधा नहीं है।
शौचालय है लेकिन पानी नहीं होने से वह बेकार है।

यहां सीसीटीवी कैमरा चालू मिला। इसके बाद जागरण की टीम मालगोदाम चौक पहुंचा वहां रैन बसेरा आश्रय लेने वालों से भरा हुआ था। वहां सिर्फ बिना वर्दी में तैनात नाइट गार्ड मिला। केयर टेकर नदारत था। नाइट गार्ड ने बताया कि यह पानी एवं शौचालय की सुविधा नहीं है।

रैन बसेरा बाहर से खंडहर बना हुआ है। अंदर अन्य सभी सुविधाएं उपलब्ध थी। यहां भी सीसीटीवी कैमरा चालू मिला। रैन बसेरा तक पहुंचने का रास्ता पूरी तरह से जर्जर दिखा। इसके बाद दैनिक जागरण की टीम कलमबाग रैन बसेरा पहुंची यहां एक मात्र व्यक्ति आश्रय लेते मिला। यहां भी पानी की कमी दिखी। साफ-सफाई का भी अभाव दिखा।

इसके बाद टीम जिला स्कूल रैन बसेरा पहुंची, यहां चार लोग आश्रय ले रहे थे। आश्रय स्थल में पानी एवं शौचालय की सुविधा नहीं दिखी लेकिन बगल में सार्वजनिक शौचालय होने के कारण आश्रय लेने वालों को परेशानी नहीं होती। यहां सिर्फ केयर टेकर बबलू कुमार तैनात मिला।

उसने बताया कि यहां नाइट गार्ड नहीं है। इस प्रकार सभी रैन बसेरा कैमरे की निगरानी में दिखा। किसी भी रैन बसेरा पर सस्ते दर पर भोजन की सुविधा उपलब्ध नहीं दिखी जबकि यह जिम्मेवारी जीविका दीदी की रसोई को उपलब्ध कराना है।
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