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सोनभद्र में चार साल में ही बीमार हो चला आयुष अस्पताल, चाहिए दवाओं की बड़ी डोज

cy520520 2025-12-8 21:10:50 views 980
  

इस अस्पताल को ही अब दवाओं की बड़ी डोज की दरकार पड़ गई है।



मुकेश चंद्र श्रीवास्तव, सोनभद्र। लगभग चार साल पहले सोनांचल के लोगों को राहत प्रदान करने के लिए 50 बेड का आयुष अस्पताल खोला गया। इसमें आयुर्वेद, होम्योपैथ व यूनानी तीनों ही पद्धति से मरीजों का उपचार किया जाता है। हालांकि यह अस्पताल इन दिनों खुद ही बीमार चल रहा है। ऐसे में इस अस्पताल को ही अब दवाओं की बड़ी डोज की दरकार पड़ गई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

यहां लगभग 110 प्रकार की दवाओं की आवश्यकता है। बावजूद इसके स्थिति लिस्ट में लगभग 61 दवाओं के ही नाम हैं, उसमें से भी वर्तमान में यहां मात्र 10 किस्म की ही औषधियां ही उपलब्ध है। उसकी मात्रा भी कम ही है। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों का उपचार भगवान भरोसे ही है। मरीजों को बाहर की दुकानों से महंगी दवाएं लेनी पड़ती है। यहां पर लगभग डेढ़ साल से दवाओं की कमी बनी हुुई है। बावजूद इसके प्रशासन स्तर पर ठोस पहल का अभाव है।

  

नाम का अस्पताल, एक महिला चिकित्सा या सर्जन तक तक नहीं

कई जिलों में स्थित सामुदायिक चिकित्सा केंद्रों तक में महिला डाक्टर तैनात है। जहां सिजेरियन की सुविधा है। यहां तो पूरा अस्पताल ही है, लेकिन बस नाम का। एक महिला चिकित्सक तक नहीं है और ना ही सर्जन। माना, आयुर्वेदिक पद्धति में आपरेशन को बढ़ावा नहीं दिया जाता, लेकिन कम से कम स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग तो होना ही चाहिए।

आसपास की महिलाओं को प्रसव के लिए दूर या प्राइवेट अस्पतालों में नहीं जाना पड़े। सिर्फ भवन खड़ा कर देने से जरूरतमंद लोगों को थोड़े ही लाभ मिल जाएगा। हालांकि यहां पर एक मात्र शल्य क्रिया (एमएस) के विशेषज्ञ चिकित्सक डा. जेपी त्रिपाठी हैं। हालांकि इनके भी हाथ बंधे हुए हैं। कारण कि यहां पर सर्जरी या इमरजेंसी में उपयोग होने वाली भी दवाएं भी नहीं है। अगर ये सुविधाएं हो जाए तो शल्य क्रिया भी शुरू हो सकती है। यहां आपरेशन थियेटर तो है ही।





डाक्टरों की स्थिति :
- आयुर्वेद विभाग में एक वरिष्ठ चिकित्साधिकारी, दो चिकित्साधिकारी व रेजिडेंट डाक्टर हैं। इसके अलावा होम्योपैथिक विभाग में दो एवं यूनानी विभाग में एक चिकित्सक हैं। वहीं चार स्टाफ नर्स हैं।

ये सुविधाएं उपलब्ध :
- इस अस्पताल में पंचकर्मा के साथ ही साथ ही फीजियोथेरेपी की व्यवस्था है। इसमें सर्वाइकल से पीड़ितों को राहत प्रदान करने के लिए लंबर, सोल्डर, ब्राइब्रेटर आदि की सुविधा प्रदान की जा रही है।

  


दवाओं की आपूर्ति के लिए शासन को लगातार लिखा जा रहा है। साथ ही स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ व एक सर्जन की भी मांग की गई है।
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डा. ज्योर्तिजय कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, 50 शैय्या एकीकृत आयुष चिकित्सालय, सोनभद्र
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