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रांची रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त, रातभर खुली ट्रेन बनी रैन बसेरा; RPF रही बेखबर

LHC0088 2025-12-8 06:36:29 views 942
  

रांची रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था का खुलेआम बना मजाक।



जागरण संवाददाता, रांची। रविवार की रात रांची रेलवे स्टेशन का नजारा ऐसा था जिसने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। प्लेटफार्म पर रात 10 बजे खड़ी रांची–लोहरदगा पैसेंजर ट्रेन को लोगों ने मानो रैन बसेरा बना दिया था। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

कोई ट्रेन के भीतर ही बेंच पर चादर बिछाकर सो गया था, तो कुछ लोग ट्रेन के पास ही खुले में शौच करते दिखे। यह सब कुछ स्टेशन परिसर में यात्रियों की आंखों के सामने हो रहा था, लेकिन न रेलवे पुलिस और न ही स्टाफ का कोई भी कर्मी इसे रोकने पहुंचा।
सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ती रहीं

ट्रेन रातभर स्टैंडिंग में रहती है और सुबह पहली सेवा के रूप में रवाना होती है। ऐसे में रेलवे के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि स्टेशन पर रातभर खड़ी किसी भी ट्रेन के सभी दरवाजे बंद हों, ताकि असामाजिक तत्वों का प्रवेश रोका जा सके और कोई अप्रिय घटना न हो। लेकिन रविवार की रात यह पूरी ट्रेन खुली पड़ी थी।

सभी बोगियों के दरवाजे खुले थे, कोई भी आसानी से अंदर आ-जा रहा था। कई ऐसे लोग, जिनका रेलवे से कोई संबंध नहीं, ट्रेन को ही रात गुजारने का स्थान मान बैठे। न टिकट, न पहचान, बिना किसी रोकटोक के लोग ट्रेन में सोते रहे।

रेलवे के कर्मचारियों की मानें तो ऐसी खुली ट्रेनें चोरी, छेड़छाड़, नशेड़ियों के जमावड़े और यहां तक कि गंभीर आपराधिक वारदातों का केंद्र बन सकती हैं। अतीत में भी कई बार रातभर खड़ी ट्रेनों में मोबाइल चोरी, सीट काटकर सामान चोरी और महिलाओं से छेड़छाड़ की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
ट्रेन के बाहर ही बना दिया ‘खुला शौचालय’

रात 10.30 बजे के बाद तो स्थिति और शर्मनाक दिखी। ट्रेन के निकट ही लोगों ने खुले में शौच शुरू कर दिया। स्टेशन परिसर में इतनी गंभीर अस्वच्छता खुलेआम होती रही, लेकिन न कोई टीटीई, न स्टेशन मास्टर का कर्मचारी और न ही आरपीएफ का एक भी जवान मौके पर नजर आया, जो इसे रोकता।

यह सब उस स्थान पर हो रहा था जहां दिनभर हजारों यात्री गुजरते हैं। खुले में शौच की यह स्थिति केवल अस्वच्छता ही नहीं, बल्कि रेलवे परिसर में स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा बड़ा खतरा भी है।
सुरक्षा में ऐसी लापरवाही क्यों

रात में संटिंग लाइन और प्लेटफार्म की निगरानी अक्सर कमजोर रहती है। कई बार ड्यूटी पर तैनात कर्मी दूसरे कार्यों में लग जाते हैं या वास्तविक निगरानी नहीं करते। आरपीएफ की गश्ती भी कई दिनों से कम दिखाई दे रही है। सामान्यत ऐसी ट्रेनें बैरिंग में खड़ी की जाती हैं और वहां सुरक्षा का प्रावधान होता है, लेकिन रविवार की रात यह पूरी तरह से लापता दिखाई दिया।
इसे दुरुस्त करने की है जरूरत

  • रात में खड़ी ट्रेनों के सभी दरवाजों को अनिवार्य रूप से बंद करे।
  • आरपीएफ की गश्ती बढ़ाए।
  • ऐसे असामाजिक कृत्य करने वालों पर तुरंत कार्रवाई करे।
  • स्टेशन परिसर की स्वच्छता और सुरक्षा के लिए सख्त निर्देश जारी करे।
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