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जमीन घोटाला केस में हेमंत सोरेन ने दाखिल की डिस्चार्ज पिटीशन, कहा- ED के पास मुकदमा चलाने के नहीं हैं सबूत

LHC0088 2025-12-7 11:36:45 views 899
  

झारखंड मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन। (जागरण)



राज्य ब्यूरो, रांची। जमीन घोटाला मामले में आरोपित झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची स्थित प्रीवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की अदालत में डिस्चार्ज पिटीशन (बरी याचिका या मुक्ति याचिका) दाखिल की है।

उन्होंने अदालत से आग्रह किया है कि ईडी के पास उनके विरुद्ध मुकदमा चलाने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं। उनपर लगाए आरोप निराधार हैं। इसलिए उन्हें उक्त केस से बरी किया जाय।

मुख्यमंत्री की याचिका पर अभी कोर्ट ने सुनवाई नहीं की है। इस मामले में कोर्ट ईडी से उनका पक्ष जानेगी और उसके बाद जो कानून सम्मत होगा, उसके अनुरूप आगे की सुनवाई करेगी।

जमीन घोटाले के एक केस में जांच कर रही ईडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 31 जनवरी 2024 को गिरफ्तार किया था। उनपर रांची के बड़गाईं स्थित 8.86 एकड़ जमीन की घेराबंदी करवाकर कब्जे की कोशिश का आरोप लगा था। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

हालांकि, झारखंड उच्च न्यायालय ने ईडी की दलील को नहीं माना और 28 जून 2024 को उन्हें जमानत का लाभ दे दिया था। उसके बाद से ही हेमंत सोरेन जेल से बाहर हैं। ईडी ने उनके विरुद्ध चार्जशीट भी दाखिल की थी।

हेमंत सोरेन की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा था के प्रथम दृष्ट्या सबूतों को देखने के बाद यह कतई साबित नहीं हुआ है कि हेमंत सोरेन कथित अपराध के लिए दोषी हैं।

बड़गाईं अंचल के तत्कालीन राजस्व उप निरीक्षक भानू प्रताप प्रसाद के ठिकाने से बरामद कई रजिस्टरों व रेवेन्यू रिकार्ड में हेमंत सोरेन या उनके परिवार के सदस्यों का नाम नहीं था।
पीएमएलए के तहत ईसीआइआर कर मुख्यमंत्री तक पहुंची थी ईडी

रांची के सदर थाने में बड़गाईं अंचल के राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी में ईडी ने इंफोर्समेंट केस इंफार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआइआर) किया था। उक्त केस भानु प्रताप प्रसाद के निजी आवास से भारी संख्या में बरामद सरकारी दस्तावेज, पंजी टू आदि की बरामदगी मामले में दर्ज किया गया था।

इस केस की जांच के क्रम में ईडी ने दावा किया था कि बरियातू में लालू खटाल रोड स्थित 8.86 एकड़ भुईहारी जमीन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कब्जा करते हुए उसकी घेराबंदी कराई थी। उक्त जमीन की खरीद-बिक्री नहीं हो सकती है।

ईडी ने दलील दी थी कि हेमंत सोरेन अपने व पारिवारिक सदस्यों के नाम पर उक्त जमीन को हस्तांतरित करवाने वाले थे, इससे पहले ही इसका भंडाफोड़ हो गया।

ईडी ने उक्त जमीन के केयरटेकर संतोष मुंडा आदि का बयान भी कोर्ट में सौंपा था जिसमें केयरटेकर ने भी उक्त जमीन को हेमंत सोरेन का बताया था। हाई कोर्ट ने ईडी के सबूतों को हेमंत सोरेन के विरुद्ध पर्याप्त नहीं मानते हुए जमानत का लाभ दिया था। अब हेमंत इस केस से खुद को बरी करने के लिए कोर्ट से आग्रह किए हैं।
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