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Indian Military Academy में पीपिंग सेरेमनी, जम्मू-कश्मीर के कुलबीर और असम के अनंत बने सितारे

Chikheang 2025-12-7 03:38:07 views 1264
  

जम्मू–कश्मीर के राजौरी निवासी कुलबीर कुमार और असम के दीमा हसाओ जिले के अनंत पांडे।



जागरण संवाददाता, देहरादून: भारतीय सैन्य अकादमी की स्पेशल लिस्ट–38 कोर्स से कमीशन प्राप्त अधिकारियों में कुलबीर कुमार और अनंत पांडे वे नाम हैं, जिन्होंने लंबी सैन्य सेवा के बाद न केवल अपने सपनों की उड़ान पाई, बल्कि मेहनत और समर्पण का सर्वोच्च सम्मान भी हासिल किया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

शनिवार को आयोजित पीपिंग सेरेमनी में दोनों को क्रमशः कमांडेंट गोल्ड और सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि उनके व्यक्तिगत संघर्ष की पहचान होने के साथ उन सैकड़ों सैनिकों के लिए प्रेरणा भी है, जो कभी नेतृत्व की भूमिका में आने का सपना संजोते हैं।

  
कुलबीर को मिला कमांडेंट गोल्ड मेडल  

जम्मू–कश्मीर के राजौरी निवासी कुलबीर कुमार को कमांडेंट गोल्ड मेडल मिला। एलओसी के करीब पले–बढ़े कुलबीर बचपन से ही सैन्य वातावरण के साक्षी रहे। सीमा पर तैनात सैनिकों का समर्पण उनके भीतर वर्दी के प्रति जुनून जगाता रहा। पिता यशपाल खेती-बाड़ी करते हैं, जबकि मां पिंकी देवी गृहिणी हैं।

  • सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बीच कुलबीर ने 2013 में बतौर जवान सेना में भर्ती होकर अपनी यात्रा शुरू की।
  • लगभग 13 वर्षों की सेवा ने उन्हें अनुशासन, धैर्य और दायित्व निभाने की सीख दी।


यही अनुभव अब उनके नेतृत्व की नींव बनेगा। उनकी सफलता में छोटा भाई सचिन, जो सेना में हवलदार है, भी परिवार के गर्व का हिस्सा है। कुलबीर की उपलब्धि की खुशी में पत्नी हीनू और चार वर्षीय बेटा अतिशय भी शामिल रहे।

  
अनंत को प्रदान किया कमांडेंट सिल्वर मेडल

असम के दीमा हसाओ जिले के अनंत पांडे को कमांडेंट सिल्वर मेडल प्रदान किया गया। साधारण परिवार से आने वाले अनंत के पिता छविलाल रिटायर्ड सरकारी शिक्षक और मां लक्ष्मी गृहिणी हैं।

  • उनके लिए सेना सिर्फ करियर नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और राष्ट्रसेवा का मार्ग रही।
  • वर्षों की सैन्य सेवा ने उनके भीतर आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित की।
  • इसके बल पर आज वे अधिकारी के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के लिए तैयार हैं।


सेरेमनी में उनके साथ पत्नी ज्योति जोशी पांडे, दस वर्षीय बेटी शर्वाणी और चार माह के बेटे आशुतोष ने इस खुशी को साझा किया। दोनों अधिकारियों की कहानी इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सेना केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि अवसर का मंच भी है।

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