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देश के 7.3% टीनएज बच्चों को प्रभावित कर रही मेंटल हेल्थ की समस्या, 10 तरीकों से करें इसे मैनेज

Chikheang 2025-12-6 23:12:22 views 1092
  

टीनएज मेंटल हेल्थ: कारण, लक्षण और प्रबंधन के उपाय (Picture Credit- AI Generated)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इन दिनों लोगों में मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगी है। कामकाज का प्रेशर और घर-परिवार की जिम्मेदारी अक्सर लोगों के लिए स्ट्रेस और डिप्रेशन का कारण बनती है। हालांकि, इन दिनों कम उम्र में भी लोग इन समस्याओं का शिकार बन रहे हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

हाल ही में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे (एनएचएमएस) के नतीजों को साझा किया, जिसमें पता चला कि देश में कम उम्र के ही लोग मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं। आइए जानते हैं इस सर्वे की रिपोर्ट के बारे में विस्तार से-  
छोटी उम्र में बढ़े मेंटल हेल्थ ईशू

प्रतापराव जाधव ने बताया कि 12 राज्यों में 13-17 साल की उम्र में मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर के मामले लगभग 7.3 प्रतिशत बढ़े हैं। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के समाधान और देखभाल के लिए सरकार की तरफर से 10 अक्टूबर, 2022 को एक “नेशनल टेली मेंटल हेल्थ प्रोग्राम“ शुरू किया है, जिसे मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं में मदद करने के लिए विकसित किया गया है।  
बच्चों में मेंटल हेल्थ ईशू के संकेत

  • उदासी, चिड़चिड़ापन, बेकार महसूस करना
  • व्यवहार में बदलाव
  • नींद और भूख की समस्याएं
  • पढ़ाई में मन न लगना  
  • बिना वजह शरीर में दर्द होना
  • लोगों से कटने लगा  

कैसे मैनेज करें टीनएज बच्चों में मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर

  • यूनिसेफ के मुताबिक अपने बच्चे से बात करने के तरीके खोजें। उनसे पूछें कि उनका दिन कैसा रहा और वे क्या कर रहे थे। आप उन्हें किसी काम में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
  • उन्हें याद दिलाएं कि आप उनके लिए हैं, चाहे कुछ भी हो जाए, आप उनके साथ है। उन्हें बताएं कि आप जानना चाहते हैं कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं और क्या सोच रहे हैं।  
  • यह जरूरी है कि आप उनकी भावनाओं को स्वीकार करें और समझें, भले ही यह असहज लगे। जब वे आपसे कुछ शेयर करें, तो आप “मैं समझता हूं“, “यह एक मुश्किल स्थिति लगती है“ या “यह समझ में आता है“ कहकर जवाब दे सकते हैं।
  • किशोरावस्था का मतलब है आजादी! अपने किशोर को खुद के लिए पर्याप्त समय और जगह देने की कोशिश करें। बड़े होने के साथ-साथ जगह की जरूरत महसूस होना भी स्वाभाविक है।
  • कुछ ऐसे तरीके खोजें जिनसे आप अपने टीनएज बच्चे को स्कूल के काम, घर के काम या अन्य गतिविधियों से ब्रेक लेने और अपनी पसंद की चीजें करने के लिए प्रोत्साहित कर सकें।  
  • अगर आपका बच्चा निराश महसूस करता है, तो उसके साथ मिलकर समस्याओं के कुछ समाधान निकालने पर विचार करें। कोशिश करें कि आप उन पर हावी न हों और उन्हें यह न बताएं कि उन्हें क्या करना है।
  • अपने बच्चों की राय सुनें और शांति से उनकी समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करें। याद रखें कि हर कोई तनावग्रस्त होता है।
  • जब आप गुस्से में हों, तो कभी भी किसी मुद्दे पर चर्चा न करें। दूर चले जाएं, सांस लें और शांत हो जाएं। आप बाद में अपने बच्चे से इस बारे में बात कर सकते हैं।
  • अपने बच्चे के साथ ईमानदार और पारदर्शी रहें। आप उन्हें बता सकते हैं कि आप भी अतिरिक्त तनाव का अनुभव कर रहे हैं। उन्हें यह दिखाने से कि आप अपनी कठिन भावनाओं से कैसे निपटते हैं, उन्हें यह समझने में मदद मिल सकती है कि उनकी भावनाएं ठीक हैं।
  • देखभाल करने वालों को बहुत कुछ संभालना पड़ता है। आपको भी अपनी देखभाल और सहारे की जरूरत है। खुद की देखभाल करना भी अपने किशोर को यह आदत सिखाने का एक अच्छा तरीका है।


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