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नेपाल में Gen-Z आंदोलन के बाद रोजगार का संकट, सीमा पर तेज हुई मानव तस्करी

Chikheang 2025-12-6 23:11:44 views 996
  

नेपाल में Gen-G आंदोलन के बाद रोजगार का संकट।



विश्वदीपक त्रिपाठी, महराजगंज। Gen-Z आंदोलन के बाद अस्थिरता के माहौल से अभी नेपाल उबर नहीं पाया है। उद्योग व पर्यटन व्यवसाय पर इसका सीधा असर पड़ने से रोजगार की संभावनाएं कम हो गईं हैं। जिसके चलते हाल के दिनों में मानव तस्करी की घटनाएं बढ़ी हैं। भारत-नेपाल की खुली सीमा इसमें मददगार साबित हो रही है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

पगडंडी से तस्कर नेपाली युवतियों को सीमा पार पहुंचा रहे हैं। नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र से लेकर सुदूर पहाड़ी जिलों में बैठे दलाल इस धंधे में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

भारतीय सीमा से सटे नेपाल के 27 जिलों में मानव तस्कर गिरोह ने अपना संजाल फैला रखा है। भारत व खाड़ी देशों में बेहतर नौकरी का सब्जबाग दिखाकर तस्कर उन्हें आसानी से भारतीय सीमा में प्रवेश करा दे रहे हैं।

महराजगंज-गोरखपुर मार्ग पर प्राय: पुलिस की निगहबानी के चलते नेपाली युवतियों को परतावल से पिपराइच होते हुए गोरखपुर ले जाया जा रहा है। हाल में हुई मानव तस्करी की घटनाओं के बाद एसएसबी व पुलिस टीम सतर्क हो गई है।

बीते दो माह में 10 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। अधिकांश मामलों में सीमा पर सक्रिय एसएसबी व पुलिस नेपाली युवतियों को समझाकर वापस उनके स्वजन के पास भेज देती है। कुछ मामलों में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की गई है।
नौकरी के नाम पर बुला कराने लगा शारीरिक शोषण

बीते दो माह में एंटी ह्यूमेन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएसटीयू) ने दो मामले दर्ज किए हैं। 26 नवंबर को एसएसबी ने झुलनीपुर के समीप तीन किशोरियों को पकड़ा था। पूछताछ में किशोरियों ने बताया कि उन्हें नौकरी दिलवाने की लालच में भारत बुलाया गया। यहां निचलौल स्थित आर्केस्टा में डांस करवाया गया। किशोरियों के मुताबिक निचलौल निवासी शाहरुख अली और उसके साथी विशाल व छोटू उन्हें दो माह से शारीरिक शोषण करा कर धन कमाते थे।

किशोरियां रुपंदेही जिले के थाना लुंबिनी, रोलपा जिले के अमरगंज थाना क्षेत्र व नेपाल के दांग जिले की रहने वाली हैं। एसएसबी 22 वीं वाहिनी के इंस्पेक्टर अरुण पांडेय ने बताया कि सीमा से मानव तस्करी न हो, इसके लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे 18 प्रतिशत लोग

नेपाल में 18 प्रतिशत लोग अब भी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। वहां की अर्थव्यवस्था कृषि, पर्यटन और विदेश से भेजे जाने वाले धन (रेमिटेंस)पर निर्भर है। विदेश में काम करने वाले नेपाली नागरिकों द्वारा भेजा जाने वाला धन जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत है।

रेमिटेंस विदेशी मुद्रा भंडार व अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण स्रोत है। हाल में हुई राजनीतिक अस्थिरता के कारण नेपाल का मानव विकास सूचकांक (एसडीआइ) कम हुआ है। जिससे वहां के युवक व युवतियों का पलायन हो रहा है।


मानव तस्करी रोकने के लिए भारत-नेपाल सीमा पर निरंतर चौकसी के निर्देश दिए गए हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों से समन्वय बना कर संयुक्त गश्त की जा रही है। पूरी जानकारी के बिना कोई महिला नौकरी के लिए विदेश न जाए , इसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है। -सूरज कार्की, सूचना अधिकारी, जिला प्रहरी कार्यालय, रुपंदेही (नेपाल)।
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