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विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग पहुंचा सिकंदराबाद, 15 तक बिहार पहुंचने की उम्मीद

LHC0088 2025-12-5 00:09:44 views 1244
  



संजय कुमार सिंह, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। तमिलनाडु के महाबलीपुरम से लाया जा रहा दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग अब अपने गंतव्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

लगभग 800 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय यह महायात्रा तेलंगाना के सिकंदाबाद से आगे निकल चुकी है। उम्मीद की जा रही है कि 15 दिसंबर तक शिवलिंग अपने निर्धारित स्थान पर पहुंच जाएगा।

महाबलीपुरम में विधिवत पूजा-पाठ के बाद विगत 21 नवंबर को यह यात्रा शुरू हुई थी। इस 33 फीट ऊंचे शिवलिंग को पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड अंतर्गत कैथवलिया में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाना है।

  

महाबलीपुरम की पवित्र भूमि पर आकार प्राप्त करने के बाद 210 मीट्रिक टन वजनी यह शिवलिंग केशरनाथ महादेव की पूज्य धरती पर स्थापित होकर आस्था का बड़ा केंद्र बनेगा। इसको लेकर लोगों में काफी उत्साह है।

लोग उस घड़ी का इंतजार कर रहे हैं जब वे दिव्य, भव्य व विशाल शिवलिंग को देख सकेंगे। इस संबंध में महावीर मंदिर पटना के पीआरओ अजय कुमार ने बताया कि शिवलिंग के मध्य प्रदेश पहुंचते ही महावीर मंदिर की टीम काफिले में शामिल हो जाएगी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

वहां से यात्रा को लगातार ट्रैक किया जाएगा। जगह-जगह स्वागत एवं पूजन के साथ यह महायात्रा आगे बढ़ेगी। यहां बता दें कि पूर्वी चंपारण जिला अंतर्गत केसरिया-चकिया मार्ग में अवस्थित कैथवलिया में महावीर मंदिर न्यास पटना द्वारा विराट रामायण मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है।

अपने स्वरूप के कारण यह मंदिर दुनिया के बड़े मंदिरों में से एक होगा। वर्ष 2012 में महावीर मंदिर न्यास के सचिव स्व. किशोर कुणाल द्वारा इस परियोजना को धरातल पर उतारने की पहल की गई थी। तब से वे अपने जीवन के अंतिम समय तक इस कार्य से जुड़े रहे।

वर्ष 2023 में 20 जून को मंदिर की आधारशिला रखते हुए कार्यारंभ किया गया। आधारशिला पूजन में आइपीएस अधिकारी रहे किशोर कुणाल भी शामिल थे। मंदिर की बुनियाद को काम पूरा हो चुका है। अब उसके ऊपर का निर्माण कार्य चल रहा है।

वहीं, दुनिया के सबसे ऊंचे शिवलिंग को स्थापित करने के लिए बन रहे प्लेटफार्म का काम भी पूरा कर लिया गया है। तीन तलों वाले विराट रामायण मंदिर सबसे बड़े शिखर (270 फीट) के नीचे मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम की प्रतिमा पूजा की मुद्रा में होगी। कुल 108 एकड़ क्षेत्रफल में बनने वाले इस मंदिर की लंबाई 1080 फीट एवं चौड़ाई 540 फीट होगी। शिखरों की कुल संख्या 15 होगी। इनमें सबसे बड़ा शिखर 270 फीट ऊंचा होगा।
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