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प्रदूषण और मौसम बदलने का दोहरा असर: वायरल के बाद खांसी लंबी खिंच रही, अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़

LHC0088 2025-12-3 13:38:21 views 441
  

वायु प्रदूषण और मौसम में अचानक आए बदलाव का सीधा असर लोगों की सेहत पर



जागरण संवाददाता, पटना। शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण और मौसम में अचानक आए बदलाव का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। जहां एक ओर वायरल बुखार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वायरल संक्रमण के बाद लंबे समय तक खांसी न ठीक होने की शिकायतें तेजी से सामने आ रही हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

हालात यह हैं कि आइजीआइएमएस के टीबी और चेस्ट विभाग की ओपीडी में हर दिन बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें वायरल से ठीक होने के बाद भी लगातार खांसी, गले में जलन और कुछ फंसा होने जैसी समस्या बनी हुई है।

विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष शंकर के अनुसार सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को उनकी ओपीडी में लगभग 300 मरीज आते हैं।

इनमें करीब 100 मरीज सिर्फ वायरल के बाद लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी और श्वसन तंत्र से जुड़ी परेशानियों के कारण परामर्श लेने पहुंचते हैं।

उन्होंने बताया कि मौसम में ठंडक बढ़ने के साथ ही हवा में मौजूद धूल, स्मॉग और धुएं के महीन कण नीचे की परत में जमा होने लगते हैं, जो फेफड़ों और श्वसन तंत्र को कमजोर कर देते हैं।

ऐसे में जो मरीज हाल में वायरल संक्रमण से उबरे होते हैं, उनमें सूजन के कारण खांसी कई हफ्तों तक बनी रह सकती है।

डॉ. शंकर के अनुसार, कई मरीजों में समस्या इतनी बढ़ जाती है कि खांसी के साथ सांस लेने में तकलीफ भी होने लगती है।

प्रदूषण के असर से पहले से सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) और अस्थमा से पीड़ित मरीजों की स्थिति भी बिगड़ रही है।

ऐसे रोगी ठंड और प्रदूषण दोनों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, इसलिए उनकी संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

डॉक्टरों ने कहा है कि इस मौसम में लापरवाही बिल्कुल नहीं बरतनी चाहिए, क्योंकि कमजोर श्वसन तंत्र वाले लोगों के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
डॉक्टरों ने दी ये सावधानियां

  • प्रदूषण वाली जगहों पर जाते समय एन-95 या अच्छे क्वालिटी का मास्क जरूर पहनें।


  • धूल-मिट्टी और वाहन के धुएं से यथासंभव दूरी बनाएं।


  • गुनगुना पानी पिएं, गला साफ रखने के लिए दिन में दो बार भाप लें।


  • घर और ऑफिस में हवा का सही वेंटिलेशन सुनिश्चित करें।


  • बच्चों, बुजुर्गों और पहले से फेफड़ों के मरीजों को विशेष सावधानी बरतें।


  • यदि खांसी तीन सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहती है, बलगम में बदलाव दिखे या सांस लेने में कठिनाई हो, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।


डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण और मौसम दोनों मिलकर श्वसन तंत्र पर दबाव बढ़ा रहे हैं, इसलिए जागरूकता और सावधानी ही इससे बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।
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