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एक किडनैपिंग, पांच आतंकियों की रिहाई: कैसे रुबिया सईद मामले ने 1989 में दिल्ली से लंदन तक हिला दी सियासत

deltin33 2025-12-2 19:38:42 views 812
  



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली/श्रीनगर। साल के आखिरी महीने दिसंबर में कल यानी सोमवार को सीबीआई को एक बड़ी सफलता हाथ लगी। जम्मू-कश्मीर में 36 साल पहले हुए आतंकी हिंसा के दुष्चक्र के चर्चित मामलों में एक रुबिया सईद अपहरण मामले में आरोपित शफात अहमद शंगलू को गिरफ्तार कर लिया गया। CBI का कहना है कि उसे जल्द ही जम्मू की TADA अदालत में कानून के मुताबिक पेश किया जाएगा। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

साल 1989 की बात है, कश्मीर पहले ही उथल-पुथल था और इस बीच एक घटना हुई जिसने पूरे देश की राजनीति, सुरक्षा ढांचे और कश्मीर की दिशा बदल दी। यह घटना थी तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की 23 वर्षीय बेटी रूबैया सईद का अपहरण। जब तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की छोटी बेटी और महबूबा मुफ्ती की बहन रुबिया सईद श्रीनगर के ललदेद अस्पताल से घर जा रही थीं। तभी बीच रास्ते में आतंकियों ने उन्हें मिनी बस से उतारकर अगवा कर लिया था।
1989 का रुबिया सईद केस क्या है?

1989 में हुआ ये अपहरण अचानक नहीं था, बल्कि सोची समझी साजिश थी। आतंकी अपनी मांगों को लेकर उस समय स्पष्ट थे। वीपी सिंह प्रधानमंत्री थे और जम्मू-कश्मीर में फारूक अब्दुल्ला की सरकार थी। फारूक उस समय लंदन में थे, ऐसे में रुबिया केस की गूंज लंदन तक पहुंची थी। कश्मीर में उस समय आतंकवाद तेजी से बढ़ रहा था और अलगाववादी संगठन जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) अपनी ताकत दिखाने के लिए एक हाई-प्रोफाइल टारगेट चाहता था। जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट की उस समय मांग थी कि कैसे भी करके उसके पांच कमांडरों को छोड़ा जाए।
कौन थे वो पांच आतंकी?

जेकेएलएफ के पांच कमांडरों में हमीद शेख,शेर खान, नूर मोहम्मद कलवाल,जावेद जरगर और अल्ताफ अहमद शामिल थे। आतंकी रुबिया के बदले जेकेएलएफ के पांच कमांडरों की रिहाई चाहते थे। हालांकि, सीएम फारूक अब्दुल्ला ने आतंकवादियों को छोड़ने के खिलाफ थे। करीब पांच दिन की बातचीत और तनाव के बाद 13 दिसंबर, 1989 को केंद्र सरकार को बात माननी भी पड़ी, इधर पांच आतंकियों को रिहा किया गया और उधर रुबिया सईद को भी आतंकियों ने छोड़ दिया।
सीबीआई ने मामले में शुरू की जांच

इसके बाद 1990 में इस मामले में सीबीआई को जांच सौंपी गई। अपहरण केस का मुख्य आरोपी यासीन था, उसके और उसके सहयोगियों के खिलाफ इनाम घोषित किया गया। यासीन मलिक फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है। 2023 के दौरान NIA अदालत ने टेरर फंडिंग मामले में उसे सजा सुनाई थी।
कौन है शफात अहमद शंगलू?

शफात शंगलू श्रीनगर में डाउन टाउन के हवल का रहने वाला है और बीते कुछ वर्ष से इशबर निशात में रह रहा था। सीबीआई के मुताबिक, शफात शंगलू ने रुबिया सईद के अपहरण में अहम भूमिका निभाई है और वह जेकेएलएफ कमांडर यासीन मलिक के करीबियों में एक गिना जाता है। उधर, रुबिया सईद की शादी दक्षिण भारत में हुई है और वह तमिलनाडु में रहती हैं। वह 36 साल पुराने मामले की जांच कर रही सीबीआई के लिए एक सरकारी गवाह भी हैं। संबधित सूत्रों के अनुसार रुबिया सईद ने जुलाई 2022 को अदालत में यासीन मलिक समेत जिन तीन आतंकियों को अपने अपहरणकर्ता के रूप में चिह्नित किया है,उनमें शफात शंगलू भी शामिल है।

ये भी पढ़ें: शुरू से ही सवालों के घेरे में रहा है, अपहरण मुफ्ती सईद का ही सियासी ड्रामा था!
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