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अल कायदा से जुड़े हैं बांग्लादेश के मुखिया मोहम्मद यूनुस के तार, रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

Chikheang 2025-11-28 03:07:13 views 899
  

अल कायदा से जुड़े हैं बांग्लादेश के मुखिया मोहम्मद यूनुस के तार:रिपोर्ट्स



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बांग्लादेश के अग्रणी साप्ताहिक अखबार ब्लिट्ज ने पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के हवाले से दावा किया है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के तार दुर्दांत आतंकवादी संगठन अल कायदा से जुड़े हुए हैं। उनकी माइक्रोफाइनेंस संस्था - ग्रामीण नेटवर्क - ओसामा बिन लादेन और अल कायदा के बड़े फाइनेंसरों से जुड़ी रही है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

अखबार के संपादक सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने इस मामले की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है। रिपोर्ट में कहा गया कि मार्च 2003 में अमेरिकी मीडिया- द वाल स्ट्रीट जर्नल ने अल कायदा के दानकर्ताओं की सूची छापी थी, जिसमें यूनुस की संस्था जमील का भी उल्लेख था।
यूनुस के अल कायदा से संबंध का दावा

इस संस्था के बोर्ड में सऊदी कारोबारी अब्दुल लतीफ जमील भी जुड़ा हुआ था। जमील ग्रामीण-जमील माइक्रोफाइनेंस के निदेशक मंडल में शामिल था और उसे अल कायदा के बड़े वित्तपोषकों में से एक माना जाता है। यह कंपनी 2007 में ग्रामीण फाउंडेशन और अब्दुल लतीफ जमील ग्रुप की सहायक इकाई के संयुक्त उपक्रम के रूप में स्थापित हुई थी, जिसका उद्देश्य अरब दुनिया में गरीबी उन्मूलन और माइक्रोफाइनेंस विस्तार बताया गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कंपनी साइप्रस में पंजीकृत है तथा दुबई के इंटरनेशनल ह्यूमैनिटेरियन सिटी से संचालित होती है। कंपनी की वेबसाइट और फेसबुक पेज लंबे समय से निष्कि्रय पाए गए हैं।
ग्रामीण नेटवर्क पर वित्तीय पोषण का आरोप

ग्रामीण-जमी के चेयरमैन जाहिर अल मुनेज्द के अब्दुल लतीफ जमील ग्रुप के शीर्ष नेतृत्व से घनिष्ठ व्यावसायिक संबंधों का भी उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।जमील परिवार का विवादित इतिहासब्लिट्ज रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जमील परिवार के कुछ सदस्यों के नाम अतीत में कई विवादों में उछल चुके हैं।

इसमें यूसुफ जमील का जिक्र है, जिसे लंदन के कैसीनो सर्किलों से लेकर जेफ्री एपस्टीन की कुख्यात \“ब्लैक बुक\“ तक जुड़ा बताया जाता है। संडे टाइम्स की एक रिपोर्ट में 2003 में प्रकाशित आरोपों पर जमील ने ब्रिटेन में मानहानि का मुकदमा भी दायर किया था।
अंतर्राष्ट्रीय जांच की मांग उठी

हालांकि 2006 में ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट ने द वाल स्ट्रीट जर्नल के पक्ष में फैसला देते हुए रिपोर्ट को जनहित में प्रकाशित बताया।ग्रामीण नेटवर्क पर अन्य संदेहब्लिट्ज रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ग्रामीण की कुछ वैश्विक संस्थाओं के मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े तत्वों के साथ कथित संबंधों की भी जानकारी सामने आई है।

यहां तक कि कुछ आरोपों में यह भी कहा गया है कि कर्ज न चुका पाने वाले व्यक्तियों को अवैध अंग व्यापार में धकेला गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों पर अब तक प्रो. यूनुस या ग्रामीण नेटवर्क की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अत्यधिक सम्मानित माइक्रोफाइनेंस माडल को लेकर उठे ये नए सवाल अब एक विस्तृत और पारदर्शी जांच की मांग को बल दे रहे हैं।

(न्यूज एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)
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