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हाय रे सिस्टम! हार्दिक की मौत ने ताजा कर दी बेटे अमन की यादें, मंजर याद कर फफक पड़े पिता

cy520520 2025-11-27 16:07:38 views 357
  

मंजर बयां करते हुए फफकते अमन के पिता सुरेश और उन्हें संभालते परिजन। जागरण



जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़। बहादुरगढ़ में ब्रिगेडियर होशियार सिंह स्टेडियम में बास्केटबॉल का पोल गिरने से 15 वर्षीय खिलाड़ी अमन की मौत का मामला तूल पकड़ गया है। चौतरफा आक्रोश के बाद प्रशासन में हलचल मच गई। अब इस मामले में कमेठी गठित कर जांच करने और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

वहीं, मौके के हालात बता रहे हैं कि यहां खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर घोर लापरवाही बरती गई। बास्टेकबॉल के दो जर्जर पोल अभी और हैं। इनको लगाने में नियमों का पालन नहीं हो रखा। लाइट पोल से भी बिजली तार खुले पड़े हैं।

उधर, अमन का परिवार गहरे दुख में डूबा है। बेटे की मौत का मंजर याद कर अमन के पिता सुरेश कुछ-कुछ देर में फफक पड़ते हैं। मां के आंसू नहीं थम नहीं रहे हैं। परिवार का कहना है कि अमन की मौत के लिए खेल विभाग के अधिकारी और लापरवाही बरतने वाले पीजीआई के डॉक्टर व स्टाफ जिम्मेदार हैं।

  

अमन के पिता सुरेश डीआरडीओ में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं, जबकि मां प्राइवेट स्कूल में शिक्षक है। अमन की दो बड़ी बहनें हैं। शहर के श्रीरामा भारती स्कूल में दसवीं के छात्र अमन ने हाल ही में स्कूल में तीन पदक जीते थे। घटना से स्कूल में भी शोक रहा।

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पिता की जुबानी... 23 नवंबर को मैं मार्केट से आ रहा था। रास्ते में अमन स्टेडियम की तरफ जा रहा था। उसने कहा कुछ देर में आ रहा हूं। जैसे ही मैं घर पहुंचा तभी फोन आया। बताया कि अमन को पोल गिरने से चोट लगी है। उसे अस्पताल लेकर जा रहे हैं। मैं और मेरा भतीजा गाड़ी लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे। अमन को रेफर कर दिया।

वहीं, रोहतक जाते समय अमन तड़पता रहा। पीजीआई में पहुंचे तो अल्ट्रासाउंड के लिए भेज दिया। वहां कमरे में कोई नहीं मिला। हम अमन को स्ट्रेचर पर लेकर इंतजार करते रहे। पौने घंटे बाद अल्ट्रासाउंड रूम में मैडम आई। अल्ट्रासाउंड हुआ तो बोले ज्यादा गंभीर हालत है। पेट के अंदर रक्तस्राव हो रहा है। अमन के इलाज में ज्यादा कुछ नहीं हुआ। ग्लूकोज लगाकर साइड में कर दिया। अमन तड़प रहा था। बार-बार पानी मांग रहा था। उसकी आंखें ठहरने लगी। शरीर पीला पड़ गया।

  

फिर उसने आंखें बंद कर ली। मैं चीखा.. तो यह देख मेरे भतीजे को गुस्सा आ गया। उसने टेबल इधर से उधर कर दी। फिर डॉक्टरों ने पुलिस को फोन कर दिया। पुलिस आई तो मैंने आपबीती बताई। पुलिसकर्मी बोला उठाकर थाने में डाल देंगे। मैंने कहा डाल दो अब तो रहा ही क्या है... मैं तो मिट्टी (मृतप्राय अमन) ही ले रखा हूं। यह मंजर बयां करते हुए अमन के पिता सुरेश फफक पड़े।


बास्केटबॉल पोल पुराने हो चुके थे। यह गलती तो है, लेकिन खेल विभाग के पास यहां की देखरेख का जिम्मा नहीं है। अब सभी जगह उपकरणों की जांच होगी। इस स्टेडियम में खेल विभाग के अंतर्गत केवल कुश्ती नर्सरी है। जहां पर बास्केटबॉल कोर्ट है, वह जमीन स्कूल की है। - सतेंद्र सिंह, जिला खेल अधिकारी, झज्जर

स्टेडियम में बास्केटबॉल कोर्ट की यह जमीन स्कूल की है। 26 साल पहले ये पोल लगे थे, मगर इनका जिम्मा शिक्षा विभाग के पास नहीं है। - शेर सिंह, बीईओ, बहादुरगढ़

इस व्यवस्था की जिम्मेदारी निश्चित तौर पर खेल विभाग की है। इस बारे में कमेटी गठित कर जांच की जाएगी और जो भी दोषी है, उस पर उचित कार्रवाई होगी। - नसीब कुमार, एसडीएम, बहादुरगढ़
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