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तमिलनाडु से आज पहुंचेगा पुजारियाें का दल, मां विशालाक्षी शक्तिपीठ का कल से कुंभाभिषेक

deltin33 2025-11-27 14:37:15 views 1147
  

मंदिर के रंग-रोगन का कार्य लगभग पूर्ण, तमिल ब्राह्मण कराएंगे पूजन। जागरण  



जागरण संवाददाता, वाराणसी। मां सती के 51 शक्तिपीठों में से एक प्रमुख मां विशालाक्षी शक्तिपीठ का प्रत्येक 12 वर्ष पर होने वाला कुंभाभिषेक शुक्रवार से आरंभ होगा। इसके निमित्त कर्मकांडी व वैदिक विद्वान ब्राह्मण पुजारियों का दल गुुरुवार को तमिलनाडु से यहां पहुंचेगा। शुक्रवार को प्रथम दिन गणपति पूजन के साथ कुंभाभिषेक के विभिन्न अनुष्ठान आरंभ हो जाएंगे। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

मंदिर के महंत पं. राजनाथ तिवारी ने बताया कि मंदिर का कुंभाभिषेक प्रत्येक 12 वर्ष पर होने वाला एक भव्य धार्मिक अनुष्ठान है। इसमें पूरे धार्मिक विधि-विधान से मंदिर का जीर्णोद्धार कर, रंग-राेगन कर नया स्वरूप दिया जाता है। इसके अंतर्गत विविध धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। प्रत्येक 12 वर्ष पर कुंभाभिषेक कराने का दायित्व नाटकोट्टम क्षत्रम नामक दक्षिण भारत की संस्था निर्वहन करती है।

क्षत्रम के प्रबंधक ने बताया कि कुंभाभिषेक में पूरे देश से, विशेष तौर पर दक्षिण भारत से हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे। इसके लिए शिखर पूजन 11 सितंबर को किया जा चुका है। आयोजन के सभी अनुष्ठान दक्षिण भारतीय पद्धति से होंगे। इसके लिए गुरुवार को दक्षिण भारतीय वैदिक विद्वानों व कर्मकांडियों का समूह यहां पहुंच जाएगा। मंदिर के रंग-रोगन व जीर्णाेद्धार का काम जोरों से चल रहा है।

उन्होंने बताया कि 29 नवंबर की सायंकाल प्रथम याज्ञशाला का आयोजन होगा और 30 नवंबर को प्रात: और सायंकाल याज्ञशला में विविध यज्ञ, धार्मिक अनुष्ठान, लक्षार्चन, कमकुमाभिषेक, सूक्त पाठ आदि होंगे। एक दिसंबर को कुंभाभिषेक किया जाएगा और इसके साथ ही शिखर पर एक धागा बांधकर उसे गर्भगृह में स्थापित देवी विग्रह तक लाया जाएगा, इसके पश्चात देवी प्रतिमा में पुनर्प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। यह अनुष्ठान पूरे मंदिर वास्तु को देवमय बनाने का अनुष्ठान होता है।

अभी तक नहीं बदले जा सके फर्श के टूटे पत्थर व खराब दरवाजा
मां विशालाक्षी के दरबार में कुंभाभिषेक की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं लेेकिन अभी तक कई कार्य अधूरे पड़े हुए हैं। मंदिर परिसर में नालियों ऊपर लगे संगमरमर के चौकाेर पत्थर कई स्थानों पर टूटे पड़े हैं लेकिन उन्हें अभी तक बदला नहीं जा सका ह। इसी तरह मंदिर में लगा लकड़ी का सैकड़ों वर्ष पुराना दरवाजा लगभग पूरी तरह से सड़ चुका है।

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मंदिर के लोगों ने कार्य कराने वाली धार्मिक संस्था क्षत्रम से दूसरा दरवाजा लगाने का आग्रह किया था लेकिन उसे भी बदला नहीं जा सका है, बुधवार को कुछ कारीगर उसे ही रंग-रोगन कर लगाने के लिए तैयार कर रहे थे।

स्थापना के लिए तमिलनाडु से लाई गई हैं नई देव प्रतिमाएं
मां विशालाक्षी धाम परिसर में स्थापना के लिए मां कामाक्षी, मां मीनाक्षी, भगवान गणेश व भगवान कार्तिकेय की नई प्रस्तर प्रतिमाएं क्षत्रम के लोगाें ने तमिलनाडु से लाई हैं जो मंदिर में पहुंच चुकी हैं। अनुष्ठान के अंतिम दिवस इन मूर्तियों को विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा के साथ मंदिर के परिक्रमा पथ में स्थापित किया जाएगा।
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