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1978 के संभल दंगे में हत्या के बाद कुएं में फेंका था व्यापारी का शव, खोदाई का काम शुरू, लेकिन...

Chikheang 2025-11-27 06:37:10 views 1259
  



जागरण संवाददाता, संभल। पुराने वैभव की ओर लौट रहे संभल में एक और कुएं की जानकारी मिली है। 1978 के दंगे में व्यापारी रामचरण दास रस्तोगी की हत्या कर शव दुकान के सामान समेत कुएं में फेंककर इसे पाट दिया था। डीएम डा.राजेन्द्र पैंसिया और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने गत 24 नवंबर को इस कुएं की जानकारी मिलने पर खोदाई कराने के निर्देश दिए। सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार सोनी व नगर पालिका अधिशासी अधिकारी डा.मणिभूषण तिवारी बुधवार को मजदूरों के साथ पहुंचे। उन्होंने कुएं के आसपास की सफाई कराकर खोदाई शुरू कराई। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

पेड़ की वजह से व्यवधान आने पर वन विभाग के अधिकारियों को भी अवगत कराया गया है। कुआं पेड़ के नीचे ही है। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि 47 साल से पटे कुएं में ही वर्ष 1978 के दंगे में एक व्यापारी को मारकर फेंकने की सूचना मिली है।जामा मस्जिद सर्वे के विरोध में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा के एक साल बाद इस वर्ष 24 नवंबर को कड़ी चौकसी बरती गई। पुलिस व पीएसी के साथ अधिकारियों ने भी फ्लैग मार्च किया था।

पुलिस चौकी के पास है ऐतिहासिक कुआं

इस दौरान डीएम व एसपी को पता चला कि एकता पुलिस चौकी के पास पेड़ के बराबर ऐतिहासिक कुआं है। इसे 1978 के दंगे में व्यापारी की हत्या के बाद शव कुएं में डालकर दंगाइयों ने पाट दिया था। रामचरण दास रस्तोगी के भतीजे 50 वर्षीय सुशील कुमार से अधिकारी मिले। बकौल रामचरण, बुजुर्गों ने बताया था कि ताऊ रामचरण दास रस्तोगी की हत्या के बाद उनके शव के साथ दुकान का सामान भी कुएं में डालकर पाटा गया था।

दंगाइयों के आतंक की वजह से वह उस समय शव निकालने का साहस भी नहीं कर सके थे। 29 मार्च, 1978 को हुए दंगे में 100 से अधिक लोगों की हत्या हुई थी। कई हिंदुओं को जिंदा भी जलाया गया था। दर्जनों हिंदू परिवारों ने संभल से पलायन किया था। विभिन्न अदालतों में विचाराधीन 1978 दंगे के 16 में से आठ मुकदमों को वर्ष 1994 में तत्कालीन मुलायम सरकार ने वापस लिया था।

अन्य मुकदमे पैरवी के अभाव व गवाहों के मुकरने से खत्म हो गए थे। खग्गू सराय में मिल चुका मंदिर व कुआं : खग्गू सराय मोहल्ले में एक शिव मंदिर भी 1978 से बंद था। उसके बराबर कुएं को भी मूर्तियां डालकर पाट दिया था। इसी वर्ष अधिकारियों ने मंदिर खुलवाकर पूजा पाठ शुरू कराई है। कुएं की भी खोदाई कराई गई है। वर्तमान में मंदिर में पूजा के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। इसके अलावा संभव में करीब 55 ऐतिहासिक तीर्थ(मंदिर) और 19 कूपों को भी खोजा जा चुका है। सभी का अपना धार्मिक महत्व है।
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