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अब नहीं रुकेगा विकास: बरेली के सात नाथ मंदिरों को जोड़ने वाली 50 करोड़ की परियोजना तेज

deltin33 2025-11-27 02:08:11 views 1265
  

नाथ कार‍िडोर के तहत बनाया गया द्वार



जागरण संवाददाता, बरेली। आस्था के साथ शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विकसित किए जा रहे नाथ कारिडोर में सात नाथ मंदिरों को आपस में जोड़कर उनका पर्यटन विकास कराया जा रहा है। निर्माण कार्यों में आए छिटपुट अवरोधों को दूर कराकर रफ्तार बढ़ाई जा रही है। वनखंडी और अलखनाथ मंदिरों में निर्माण कार्यों में अड़चन आ रही थी। मामला मंडलायुक्त भूपेंद्र एस चौधरी तक पहुंचा था। उनके निर्देश पर उप निदेशक पर्यटन रवींद्र कुमार ने समस्याओं का निस्तारण करा लिया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

शहर के नाथ मंदिरों को विकसित कराने के लिए 50 करोड़ की चल रही परियोजनाओं को आगामी फरवरी माह तक पूर्ण कराने का लक्ष्य है। योगी सरकार का उद्देश्य सिर्फ मंदिरों का सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, सांस्कृतिक विरासत से युवाओं को जोड़ना और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करना है। बरेली की पहचान सदियों से एक महत्वपूर्ण नाथ तीर्थ के रूप में रही है।

अब सरकार इस विरासत को व्यवस्थित, आधुनिक और विश्वस्तरीय स्वरूप देने में जुटी है। अलखनाथ, तपेश्वर नाथ, पशुपतिनाथ, धोपेश्वर नाथ, वनखंडी नाथ, त्रिवटीनाथ, तुलसी मठ और कांवड़ स्थल-को एक ही सर्किट में जोड़ रही है। इसके तहत प्रत्येक स्थल पर आधुनिक विकासपरक सुविधाएं, सौंदर्यीकरण और यात्री सुविधाओं के विस्तार को गति मिली है।
नाथनगरी में आध्यात्मिक पर्यटन की नई धारा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप शहर को प्रमुख नाथ पर्यटन केंद्र बनाया जाएं। कांवड़ मार्ग, प्राचीन शिवधाम, नाथ परंपरा की धरोहर और वैदिक अध्ययन स्थलों को जोड़कर महादेव धार्मिक सर्किट तैयार किया जा रहा है जो श्रद्धालुओं, युवाओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेेंगे। बदायूं रोड पर चार करोड़ की लागत से कांवड़ स्थल तैयार किया जा रहा है। सावन में लाखों शिवभक्तों की भीड़ को देखते हुए यहां विशाल हाल, पुरुष–महिला परिसर, विश्राम स्थल और बेहतर सुविधाओं का निर्माण कराया जाएगा।
युवाओं के लिए सृजित होंगे रोजगार के नए अवसर

प्रशासन का दावा है कि नाथ कारिडोर की परियोजनाओं के पूरा होने के बाद धार्मिक पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, जिससे होटल, परिवहन, भोजनालय, फूल, प्रसाद और स्थानीय व्यापार में बड़ा उछाल आएगा। हजारों युवाओं के लिए नई रोजगार संभावनाएं खुलेंगी और बरेली की पहचान एक विकसित नाथ तीर्थ और आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि नाथ परंपरा उत्तर भारत की सांस्कृतिक रीढ़ है। नाथनगरी को उसी गरिमा के अनुरूप विकसित किया जाएगा।
वनखंडीनाथ प्राचीन मंदिर : 5 करोड़ 82 लाख 8 हजार रुपये से धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में उभर रहा है। फ्लोरिस्ट दुकानें और प्रसाद केंद्र के साथ इसका स्वरूप पूरी तरह बदलने जा रहा है।
तपेश्वर नाथ मंदिर : 8 करोड़ 36 लाख 98 हजार रुपये से मुख्य प्रवेश द्वार, विशाल स्टेज, भंडारा हाल और नए प्रसाद केंद्र के साथ इसे महादेव सर्किट में शामिल किया जा रहा है।
धोपेश्वर नाथ : 7 करोड़ 71 लाख 50 हजार रुपये से परिसर में पार्किंग, लाइब्रेरी, फ्लोरिस्ट शॉप और आकर्षक लैंडस्केपिंग के साथ यह स्थान पर्यटक अनुकूल धार्मिक केंद्र बनाया जा रहा है।
तुलसी मठ : 9 करोड़ 71 लाख 74 हजार रुपये से वैदिक लाइब्रेरी, मुख्य द्वार, मंच और धर्मशाला के साथ इस स्थल को वैदिक शोध व आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी चल रही है।
पशुपतिनाथ मंदिर : दो करोड़ 98 लाख 93 हजार रुपये की लागत से संरचनात्मक कार्यों से इसकी प्राचीनता को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ा जा रहा है। मुख्यद्वार के साथ फोकस वाल का भी निर्माण कराया जा रहा है।
अलखनाथ मंदिर : इस मंदिर में 11 करोड़ 67 लाख 40 हजार रुपये की लागत से वैदिक लाइब्रेरी, आस्था पथ, भव्य द्वार और विस्तृत लैंडस्केपिंग के साथ यह बरेली का सर्वाधिक विकसित धार्मिक स्थल बन जाएगा।
त्रिवटीनाथ मंदिर : छह करोड़ 55 लाख 65 हजार रुपये की लागत से प्रसाद केंद्र, फ्लोरिस्ट शाप और विशाल सत्संग मंडप के साथ यह स्थल भक्तों की सुविधाओं के लिए एक आदर्श माडल बनेगा।


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