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अमेरिका की अड़चन के बावजूद जी-20 घोषणापत्र अपनाया गया, दक्षिण अफ्रीका ने कहा- यह हमारे लिए एक महान पल है

deltin33 2025-11-27 02:07:45 views 791
  

अमेरिका की अड़चन के बावजूद जी-20 घोषणापत्र अपनाया गया (फोटो- एक्स)



पीटीआई, जोहानिसबर्ग। जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले शासनाध्यक्षों ने शनिवार को अमेरिका द्वारा रोकने के प्रयासों के बावजूद सर्वसम्मति से एक घोषणापत्र को स्वीकार कर लिया। दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं सहयोग मामलों के मंत्री रोनाल्ड लामोला ने सरकारी चैनल \“\“एसएबीसी\“\“ के साथ बातचीत में इस घोषणापत्र को बहुपक्षवाद की पुष्टि करार दिया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
यह हमारे लिए एक महान पल है-  दक्षिण अफ्रीका

उन्होंने कहा, यह हमारे लिए एक महान पल है, क्योंकि हमारा मानना है कि इससे अफ्रीका महाद्वीप में क्रांति आएगी। अमेरिका मेजबान देश के साथ राजनयिक मतभेद के चलते दो दिवसीय सम्मेलन का बहिष्कार कर रहा है।

शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेने और अपनी अनुपस्थिति में घोषणापत्र को अपनाने के प्रयासों में बाधा डालने के अमेरिका के कदम के बारे में लामोला ने कहा कि जी-20 अमेरिका के साथ या उसके बिना भी बरकरार रहेगा।

जी-20 को केवल आमंत्रित व्यक्ति की अनुपस्थिति के आधार पर ठप नहीं किया जा सकता। बहुपक्षीय मंच को सक्रिय रहना चाहिए। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से इसने अच्छा काम किया है, इसलिए दक्षिण अफ्रीका सभी बैठकों में यही संदेश दे रहा था कि हमें घोषणापत्र के साथ आगे बढ़ना होगा। एपी के अनुसार, जी-20 के सदस्य देशों ने परंपरा से हटकर शनिवार को शिखर सम्मेलन की शुरुआत में ही घोषणापत्र को स्वीकार कर लिया।
राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के प्रवक्ता ने कही ये बात

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के प्रवक्ता विंसेंट मैग्वेन्या ने कहा कि आमतौर पर घोषणापत्र को सबसे आखिर में अपनाया जाता है। लेकिनज् ऐसा लगा कि हमें घोषणापत्र को सबसे पहले स्वीकार करने की तरफ बढ़ना चाहिए। जोहानिसबर्ग में सम्मेलन की शुरुआत में ही नेताओं ने घोषणापत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया।
सभी देशों को जमीन पर कब्जे के लिए बल प्रयोग से बचना चाहिए

जी-20 ने शनिवार को एक सख्त संदेश में कहा कि सभी देशों को किसी अन्य देश की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध जमीन पर कब्जे की धमकी या बल प्रयोग से बचना चाहिए। घोषणापत्र में वैसे तो किसी देश का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन इसे स्पष्ट रूप से रूस, इजरायल और म्यांमार के संदर्भ में दिया गया बयान माना जा रहा है।  

  

शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले राष्ट्राध्यक्षों द्वारा सर्वसम्मति से अपनाए गए एक घोषणापत्र में यह भी कहा गया कि विभिन्न देशों को मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करना चाहिए। इसमें नस्ल, लिंग, भाषा या धर्म के भेदभाव के बिना सभी के लिए मानवाधिकार और मौलिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देना शामिल है। 39 पृष्ठों के इस दस्तावेज में ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई और आपदा से निपटने का भी प्रमुखता से उल्लेख किया गया है।
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