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भारत में कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन में आई कमी, रिसर्च में दावा

LHC0088 2025-11-27 01:25:05 views 1235
  

भारत के कार्बन उत्सर्जन में आई कमी



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन में विगत कुछ वर्षों के मुकाबले इस साल कमी आई है। 130 से अधिक जलवायु विज्ञानियों और शोध संस्थानों के एक वैश्विक नेटवर्क द्वारा गुरुवार को प्रकाशित रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन में 2025 में 1.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जो पिछले वर्षों की तुलना में धीमी वृद्धि को दर्शाता है। ब्राजील के बेलेम में काप-30 में जारी वैश्विक कार्बन बजट 2025 रिपोर्ट में कहा गया है कि मानसून के जल्दी आने के कारण कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन में कमी आई, नवीकरणीय ऊर्जा में तेज वृद्धि हुई जिससे कोयले का उपयोग लगभग स्थिर रहा।
भारत के कार्बन उत्सर्जन में आई कमी

इस कमी के बावजूद, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भारत का कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन कुल मिलाकर बढ़ता रहेगा। रिपोर्ट के लेखक पियरे फ्राइड लिगस्टीन ने कहा कि कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन में अभी भी वृद्धि हो रही है, अतएव वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखना \“\“अब संभव नहीं है\“\“।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015 और 2024 के बीच 35 देशों ने अपनी अर्थव्यवस्थाओं का विस्तार करते हुए उत्सर्जन कम करने में सफलता प्राप्त की। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर, जीवाश्म ईंधन कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन 2025 में रिकार्ड 38.1 अरब टन तक पहुंचने की उम्मीद है, जो 2024 की तुलना में लगभग 1.1 प्रतिशत अधिक है।
चीन में तीन प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान

चीन के उत्सर्जन में 2025 में लगभग तीन प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है, जो मुख्य रूप से निरंतर औद्योगिक गतिविधि और रिकार्ड नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के बावजूद कोयले की खपत में वृद्धि के कारण होगा।

दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उत्सर्जक अमेरिका में कोयले के उपयोग में गिरावट और तेल की मांग में कमी के कारण उत्सर्जन में लगभग 2.2 प्रतिशत की गिरावट आने की उम्मीद है। यूरोपीय संघ के उत्सर्जन में 4.2 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है। इन चार शीर्ष उत्सर्जकों का हिस्सा वैश्विक जीवाश्म कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन का लगभग 60 प्रतिशत है।
वैश्विक उत्सर्जन में वृद्धि का अनुमान

रिपोर्ट में कहा गया है कि भूमि और महासागरों के माध्यम से कार्बन डाइआक्साइड को अवशोषित करने की पृथ्वी की क्षमता कमजोर हो रही है।

विज्ञानियों ने अनुमान लगाया है कि 1960 के बाद से वायुमंडलीय कार्बन डाइआक्साइड में लगभग आठ प्रतिशत की वृद्धि जलवायु परिवर्तन के कारण इन प्राकृतिक सिंक (भूमि और महासागर) की प्रभावशीलता में कमी के कारण हुई है।
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