search

मोदीनगर बम विस्फोट: किताब लिख बम धमाके की रची थी साजिश, फैसला आने के 2 दिन बाद जज का हो गया था तबादला

LHC0088 2025-11-19 14:36:51 views 583
  

कोर्ट की सांकेतिक तस्वीर।  



हसीन शाह, गाजियाबाद। मोदीनगर में 27 अप्रैल 1996 में रोडवेज बस में हुए बम धमाके में 16 निर्दोष लोगों की मौत होने के मामले में गाजियाबाद के तत्कालीन अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंगल प्रसाद ने पाकिस्तानी आतंकवादी अब्दुल मतीन उर्फ इकबाल उर्फ यूसुफ और मुहम्मद इलियास को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

यह सजा 15 अप्रैल 2013 को सुनाई गई थी। जब गाजियाबाद की अदालत में केस चला तो मतीन ने एक के बाद चौंकाने वाली साजिशों से पर्दा उठाया था। एजेंसी की पूछताछ में मतीन ने बताया था कि वह बीए पास है, लेकिन उसने फिजिक्स के सिद्धांतों पर एक किताब लिखी थी। इसी किताब से उसने बम धमाके की साजिश रची थी।
पूछताछ में खुले कई राज

इलियास ने ही पूछताछ के दौरान मतीन का नाम उगला था। जिसके बाद सीबीसीआइडी ने मतीन से पूछताछ कर घटना का पर्दाफाश किया था। गाजियाबाद न्यायालय में अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता रहे राजेंद्र कसाना ने बताया कि इलियास के अधिवक्ता कुंवर मोहम्मद यामीन और मतीन के न्यायमित्र अवध त्यागी ने कोर्ट में केस लड़ा था।

इलियास का मुकदमा अधिवक्ता कुंवर मुहम्मद यामीन ने लड़ा था। मतीन अपनी किताब में बम बनाने की विधि और बम बनाने में उपयोग सामग्री के बारे में विस्तार से लिखा था। हालांकि यह किताब बरामद नहीं हो सकी थी। पूछताछ में मतीन ने कुबूल किया था कि उसने किताब के जरिये अन्य लोगों को बम बनाने के बारे में जानकारी दी थी।
तत्कालीन अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सप्तम मंगल प्रसाद ने सजा सुनाते समय कहा था अब्दुल मतीन ने विस्फोटक पदार्थ का निर्माण कर अपने सहयोगी इलियास की मदद से जन-धन हानि करने के उद्देश्य से बस में विस्फोट किया। दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

इस केस में फैसला आने से पहले न्यायाधीश मंगल प्रसाद का तबादला मेरठ हो गया था, लेकिन उन्हें रिलीव नहीं किया गया था। 15 अप्रैल 2013 को न्यायाधीश मंगल प्रसाद ने मतीन और मुहम्मद इलियास को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सजा सुनाने के दो दिन बाद उन्हें रिलीव कर मेरठ भेजा गया था।
इलियास ने बताया था मतीन का नाम

सीबीसीआइडी (क्राइम ब्रांच क्रिमिनल इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट) ने धमाके के बाद इलियास व तहसीन नामक युवकों को गिरफ्तार किया था। इलियास ने विस्फोट की साजिश में पाकिस्तानी आतंकी अब्दुल मतीन का नाम लिया था। मतीन उन दिनों जयपुर की जेल में अन्य आपराधिक मामले में बंद था।

उसे 1998 में गाजियाबाद की डासना जेल लाया गया था। अब्दुल मतीन को 1997 में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग से गिरफ्तार किया गया था। वह पाकिस्तान हरकत-उल-अंसार आपरेटिव संगठन का सदस्य था। राजस्थान में एक मामले में उसे पहले ही आजीवन कारावास की सजा हो चुकी थी।
छावनी में बदल गई थी कचहरी

15 अप्रैल 2013 को जिस दिन गाजियाबाद न्यायालय में इस मामले में फैसला आया तो जिले के लोगों की नजर इस फैसले पर थी। कोर्ट रूम अधिवक्ता के साथ अन्य लोगों से ठसाठस भरा। भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। कचहरी छावनी में तब्दील हो गई थी। कोर्ट के बाहर भी जिले में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी।
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

410K

Threads

0

Posts

1410K

Credits

Forum Veteran

Credits
146494

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com