search

'हम आजाद देश, बीजिंग का हम पर कोई हक नहीं', ट्र ...

deltin55 1970-1-1 05:00:00 views 38

ताइपे/वॉशिंगटन । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताइवान को लेकर दिए गए बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने हाल ही में ताइवान की सुरक्षा और संभावित संघर्ष को लेकर ऐसा रुख अपनाया, जिसे अमेरिका की पारंपरिक नीति से अलग माना जा रहा है। उनके बयान के बाद ताइवान ने बेहद सख्त प्रतिक्रिया देते हुए खुद को पूरी तरह स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र बताया है। ताइवान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि “रिपब्लिक ऑफ चाइना” यानी ताइवान एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और संप्रभु देश है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि बीजिंग को ताइवान पर किसी भी प्रकार की संप्रभुता का दावा करने का अधिकार नहीं है। ताइवान की इस प्रतिक्रिया ने अमेरिका-चीन-ताइवान संबंधों को लेकर नई कूटनीतिक हलचल पैदा कर दी है।




ट्रंप ने युद्ध से बनाई दूरी

फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान की रक्षा को लेकर अपेक्षाकृत नरम और सतर्क रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी नए युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता और ताइवान को लेकर तनाव बढ़ना दुनिया के लिए ठीक नहीं होगा। ट्रंप ने कहा, “अगर किसी युद्ध की स्थिति बनती है तो अमेरिका को करीब 9,500 मील की दूरी तय करनी पड़ेगी। मैं ऐसा नहीं चाहता। मैं चाहता हूं कि ताइवान शांत रहे और चीन भी शांत रहे।”




उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ताइवान को यह नहीं मान लेना चाहिए कि अमेरिका हर हाल में उसके समर्थन में युद्ध करेगा। ट्रंप ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, “हम यह नहीं देखना चाहते कि कोई सिर्फ इसलिए कहे कि अब हम स्वतंत्र हो जाएंगे क्योंकि अमेरिका हमारे पीछे खड़ा है।”
ताइवान ने खुद को बताया स्वतंत्र राष्ट्र

ट्रंप के बयान के बाद ताइवान के विदेश मंत्रालय ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय ने कहा कि ताइवान पहले से ही एक स्वतंत्र देश है और उसकी लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा संप्रभुता पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। ताइवान ने साफ किया कि चीन की ओर से किए जाने वाले दावे राजनीतिक दबाव का हिस्सा हैं और ताइपे अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखेगा। मंत्रालय के बयान को चीन के लिए सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।




चीन के लिए सबसे संवेदनशील मुद्दा

ताइवान लंबे समय से चीन और अमेरिका के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल रहा है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग के जरिए उसे अपने नियंत्रण में लेने की बात कह चुका है। हाल ही में ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान भी यह मुद्दा दोनों देशों के बीच चर्चा का प्रमुख केंद्र रहा। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप से स्पष्ट कहा कि ताइवान का मामला चीन-अमेरिका संबंधों में “सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील” विषय है।




ट्रंप ने शी जिनपिंग से बातचीत का किया जिक्र

चीन यात्रा से लौटने के बाद ट्रंप ने एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शी जिनपिंग के साथ हुई चर्चा का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि चीनी राष्ट्रपति ताइवान की स्वतंत्रता को लेकर बेहद गंभीर और सख्त रुख रखते हैं। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने चीन को कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका अभी भी अपनी रणनीति पर विचार कर रहा है और आगे की परिस्थितियों के आधार पर फैसला लिया जाएगा।

हथियार सौदे पर भी बना सस्पेंस

ताइवान को लेकर अमेरिका के भीतर भी चर्चा तेज है, खासकर हथियारों की आपूर्ति को लेकर। अमेरिकी कांग्रेस पहले ही ताइवान के लिए 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को मंजूरी दे चुकी है, लेकिन ट्रंप ने अब तक इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “मैंने अभी तक इसे मंजूरी नहीं दी है। आगे क्या होगा, यह देखा जाएगा। मैं इसे मंजूर भी कर सकता हूं और नहीं भी।” उनके इस बयान ने ताइवान की सुरक्षा रणनीति को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है अमेरिका की ‘वन चाइना’ नीति

अमेरिका आधिकारिक तौर पर ‘वन चाइना’ नीति को मान्यता देता है। इसके तहत वाशिंगटन चीन को एकमात्र वैध सरकार मानता है, लेकिन इसके बावजूद ताइवान के साथ उसके अनौपचारिक संबंध बने हुए हैं। ताइवान संबंध अधिनियम के तहत अमेरिका ताइवान को रक्षा सहायता और हथियार उपलब्ध कराता है। अमेरिकी रणनीति का मुख्य उद्देश्य ताइवान जलडमरूमध्य में किसी भी सैन्य संघर्ष को रोकना रहा है। अमेरिकी कांग्रेस के रिकॉर्ड के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन की 2025 राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में भी ताइवान की स्थिति में किसी एकतरफा बदलाव का विरोध दर्ज किया गया है।

ट्रंप ने शी के साथ बैठक को बताया ‘जी-2’

ट्रंप ने चीन यात्रा के बाद शी जिनपिंग के साथ अपनी मुलाकात को “जी-2” यानी दुनिया की दो बड़ी शक्तियों की बैठक बताया। उन्होंने कहा कि यह मुलाकात इतिहास में महत्वपूर्ण मानी जाएगी। ट्रंप के अनुसार चीन के साथ उनकी बातचीत बेहद सफल रही और दोनों देशों के बीच कई बड़े व्यापारिक समझौते हुए। उन्होंने दावा किया कि चीन ने बोइंग से 200 विमानों की खरीद का समझौता किया है और भविष्य में 750 और विमानों की खरीद का आश्वासन भी दिया है।

अमेरिकी मीडिया ने बताया चीन की कूटनीतिक जीत

वाशिंगटन पोस्ट ने ट्रंप के बयानों को चीन के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है। अखबार के मुताबिक, ट्रंप की टिप्पणियों ने चीन को अमेरिका के बराबर वैश्विक शक्ति के रूप में पेश किया है, जो लंबे समय से राष्ट्रपति शी जिनपिंग की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि ताइवान को लेकर ट्रंप का बदलता रुख आने वाले समय में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की राजनीति और अमेरिका-चीन संबंधों पर बड़ा असर डाल सकता है।






Editorial Team



China US RelationsRepublic of ChinaTaiwan NewsDonald TrumpXi JinpingChina Taiwan Tension









Next Story
like (0)
deltin55administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin55

He hasn't introduced himself yet.

410K

Threads

12

Posts

1410K

Credits

administrator

Credits
147958