कोलकाता। अभिनेत्री त्रिधा चौधरी फिल्म 'आखिरी सवाल' में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। फिल्म की कहानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बाबरी मस्जिद जैसे मुद्दों के ईर्द-गिर्द बुनी गई है। फिल्म को लेकर अभिनेत्री त्रिधा चौधरी और समीरा रेड्डी ने अपने अनुभव और विचार शेयर किए।
अभिनेत्री त्रिधा चौधरी का कहना है कि यह फिल्म महज एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भावना है। उन्होंने कहा, "मैंने इस फिल्म में 'सारा' नाम की छात्रा का किरदार निभाया है। मेरा मानना है कि शैक्षिक संस्थान ही वह जगह है, जहां भविष्य के नेता तैयार होते हैं। हम सभी की अपनी-अपनी विचारधाराएं होती हैं और उन पर हमारा अटूट विश्वास होता है।"
त्रिधा ने आगे कहा कि सिनेमा में वह ताकत है, जो आपको अपनी बात रखने की 'सिनेमाई आजादी' देती है। उन्होंने पूरी टीम का जिक्र करते हुए कहा, "इस फिल्म का उद्देश्य समाज को बांटना नहीं, बल्कि लोगों को एक गंभीर सोच से जोड़ना है। फिल्म के जरिए हमने इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी व्यक्ति के जीवन में विचारधारा कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।"
अभिनेत्री समीरा रेड्डी फिल्म के जरिए लंबे समय बाद पर्दे पर वापसी कर रही हैं। उन्होंने 'आखिरी सवाल' में वामपंथी विचारधारा वाली महिला का किरदार निभाया है, जो कहानी के भीतर की स्थिति को चुनौती देती है।
समीरा ने कोलकाता आने पर प्रसन्नता जाहिर की और कहा, "मैं यहां पर मौजूद सभी लोगों का दिल से शुक्रिया अदा करना चाहती हूं। साथ ही, सिटी ऑफ जॉय में वापस आकर बहुत खुश हूं। मैं कहना चाहूंगी कि मिथुन दा को 20 साल बाद देखकर मैं बहुत खुश हूं। तो यह वैसा पल है, जिसके लिए मैं सच में बहुत उत्साहित थी। मिथुन दा को देखकर बहुत अच्छा लगा। मुझे लगता है कि स्क्रिप्ट के बारे में सबसे प्रभावशाली बात, खासकर अभिजीत वरन जैसे नेशनल अवॉर्ड विजेता निर्देशक के साथ, यह थी कि वह कोई उपदेश नहीं दे रहे थे। वह बस तथ्य सामने रख रहे थे।"
अभिनेत्री ने अपने किरदार 'डॉ. पल्लवी' के बारे में बताया कि वह अलगाववादी विचारधारा की है। उन्होंने कहा, "यह एक ऐसा पात्र है, जो समाज में दबे हुए सवालों को कुरेदता है और लोगों के बीच हलचल पैदा करता है। एक महिला कलाकार के तौर पर इस तरह का सशक्त और चुनौतीपूर्ण किरदार निभाना मेरे लिए मजेदार था।"

Deshbandhu
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