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2582 करोड़ बकाया और 10 हजार करोड़ सब्सिडी विवाद पर हाईकोर्ट सख्त; पीएसपीसीएल संपत्ति बिक्री पर रोक

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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।



राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब स्टेट पावर कार्पोरेशन (पीएसपीसीएल) की सार्वजनिक संपत्तियों को आगे बेचे जाने पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अगले आदेशों तक रोक लगा दी है। यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सरकारी विभागों पर लंबित भारी बिजली बकाया की भरपाई के लिए निगम की परिसंपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

चंडीगढ़ निवासी राजबीर सिंह द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि अगस्त 2025 तक पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों पर पीएसपीसीएल का कुल बकाया 2,582 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके अतिरिक्त बिजली सब्सिडी के मद में राज्य सरकार पर 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबित बताई गई है।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस वित्तीय दबाव को संतुलित करने के लिए निगम की मूल्यवान सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने की कोशिश की जा रही है, जो जनहित के प्रतिकूल है।

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संपत्तियां बेचकर घाटा पूरा करना अनुचित

याचिका में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि सर्वाधिक बकाया वाटर सप्लाई एवं सेनिटेशन विभाग, स्थानीय निकाय विभाग, ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग पर है। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि जब स्वयं सरकारी विभाग नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं, तब सार्वजनिक उपक्रम की संपत्तियां बेचकर घाटा पूरा करना अनुचित और विधि-विरुद्ध है।

याचिकाकर्ता ने न्यायालय से मांग की कि डिफॉल्टर विभागों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए उनके बिजली कनेक्शन काटे जाने के निर्देश दिए जाएं तथा राज्य सरकार को लंबित बिल और सब्सिडी की राशि का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने का आदेश दिया जाए। साथ ही, पीएसपीसीएल की संपत्तियों की किसी भी प्रकार की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की भी प्रार्थना की गई।

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16 मार्च को अगली सुनवाई निर्धारित

मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने प्रारंभिक स्तर पर मामले को गंभीर मानते हुए स्पष्ट किया कि जब तक अगला आदेश पारित नहीं किया जाता, तब तक पीएसपीसीएल की संपत्तियों को आगे नहीं बेचा जाएगा। अदालत ने राज्य सरकार से इस संबंध में विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को निर्धारित की गई है, जहां राज्य सरकार को बकाया भुगतान और संपत्ति बिक्री से संबंधित अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

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