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हिमाचल में जल जीवन मिशन फंड का दुरुपयोग, 19 विश्राम गृहों पर खर्च हुए करोड़ों

LHC0088 5 hour(s) ago views 230
  



राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत केंद्र से मिले बजट के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। पूर्ववर्ती जयराम सरकार ने यह राशि मंडी जिले के धर्मपुर और सराज विधानसभा क्षेत्रों में 19 विश्राम गृह बनाने पर ही खर्च कर दी।

पूर्व जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के धर्मपुर क्षेत्र में 12 विश्राम गृह (रेस्ट हाउस, इंस्पेक्शन हट्स, किसान भवन) का निर्माण हुआ जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के विधानसभा क्षेत्र सराज में सात विश्राम गृह बनाए गए। कुल 37.85 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें 26.11 करोड़ धर्मपुर और 11.74 करोड़ सराज में खर्च किए गए।

विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन बुधवार को धर्मपुर के विधायक चंद्रशेखर के प्रश्न के उत्तर में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि धर्मपुर में 12 विश्राम गृहों में से पांच निर्माणाधीन हैं, जबकि सात का कार्य पूरा होने के बाद उनका उपयोग हो रहा है।

सराज में सात विश्राम गृहों का काम पूरा हो चुका है, जबकि एक इंस्पेक्शन हट का कार्य जारी है। अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि इन विश्राम गृहों का निर्माण इंस्पेक्शन हट्स, किसान भवन और अन्य नामों से किया गया है। जल जीवन मिशन के लिए स्वीकृत बजट में विश्राम गृह बनाने का प्रविधान नहीं था।

केंद्र ने आपत्ति जताते हुए इसके लिए बजट देने से इन्कार कर दिया है। राज्य को निर्देश दिया गया है कि 37.85 करोड़ रुपये राज्य बजट से खर्च करे।
धर्मपुर के लिए 1450 करोड़ रुपये किए थे मंजूर

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश को 6395 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। इनमें से 5167 करोड़ रुपये प्राप्त हुए जबकि 1227 करोड़ रुपये लंबित हैं।

प्रदेश के लिए 1747 योजनाएं मंजूर हुई थीं, जिनमें से 1100 का कार्य चल रहा है। धर्मपुर के लिए 1450 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था, जिसमें से 650 करोड़ रुपये के कार्य पूरे कर लिए गए हैं। केंद्र से बजट आने पर लंबित कार्यों को पूरा किया जा सकेगा। जलशक्ति विभाग में अब कोई भी विश्राम गृह बिना कैबिनेट मंजूरी के नहीं बनेगा।
केंद्र ने कहा-निश्शुल्क पानी देना बंद कर वसूलें 100 रुपये बिल

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र के पास लंबित 1227 करोड़ की राशि के लिए वह कई बार केंद्रीय मंत्री से मिल चुके हैं। 1227 करोड़ में से 600 करोड़ रुपये का काम हो चुका है।

केंद्र ने बजट जारी करने पर रोक लगाकर निश्शुल्क पानी बंद कर सामान्य परिवारों से 100 रुपये और कम आय वालों से 30 रुपये मासिक बिल वसूलने की शर्त लगाई है। कहा गया है कि मिशन के तहत पानी की योजनाएं केवल टैंक तक बनाई जाएंगी। इससे आगे का कार्य ग्रामीण विकास विभाग से कराया जाए।
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