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आईआईएम रांची में विशेषज्ञों ने कहा- एआई जरूरी है, लेकिन शिक्षक की सहानुभूति और नैतिक मार्गदर्शन अपरिहार्य

deltin33 5 hour(s) ago views 323
  

आईआईएम रांची



जागरण संवाददाता, रांची। आईआईएम रांची ने अपने कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षण केंद्र के सहयोग से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से शिक्षण विषय पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया। कार्यक्रम में अग्रणी शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने भाग लिया और उच्च शिक्षा में कक्षाओं, अनुसंधान और मूल्यांकन प्रणालियों में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका पर विचार-विमर्श किया।  

अपने स्वागत भाषण में, एआई शिक्षण केंद्र के अध्यक्ष प्रो. मनीष कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि एआई केवल परीक्षा प्रारूपों को ही नहीं बदल रहा है, बल्कि मूल्यांकन के मूल दर्शन को ही पुनर्परिभाषित कर रहा है।  

उन्होंने कहा चूंकि एआई निबंध तैयार कर सकता है, केस स्टडी हल कर सकता है और जटिल निर्णय लेने में सहायता कर सकता है, इसलिए संस्थानों को रटने और पारंपरिक उत्तर-लेखन से आगे बढ़ना होगा।  

उन्होंने कहा आलोचनात्मक सोच, नैतिक तर्क, प्रासंगिक समझ और समस्या निरूपण पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने शैक्षणिक अखंडता की रक्षा करते हुए निष्पक्ष, पारदर्शी और भविष्य के लिए तैयार मूल्यांकन प्रणालियों के निर्माण के प्रति केंद्र की प्रतिबद्धता को दोहराया।  
केंद्र को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में मान्यता मिली

वहीं, आईआईएम रांची के निदेशक, प्रो. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने वर्किंग विद एआई जैसी पहलों के माध्यम से संस्थान द्वारा एआई के सक्रिय एकीकरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्र को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में मान्यता दी है।  

संस्थान का उद्देश्य एआई-सक्षम शिक्षण विधियों और छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए लक्षित क्षमता निर्माण के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना है। साथ ही सहयोग और नवाचार को प्रोत्साहित करना है।  
इनसाइट्स पत्रिका का विमोचन

प्रो. अनुप्रिया खान ने सभा को संबोधित किया और इनसाइट्स पत्रिका का विमोचन किया। हाल के आंकड़ों का हवाला देते उन्होंने कहा उच्च शिक्षा के छात्रों के बीच एआई का उपयोग तेजी से बढ़ा है और अब अधिकांश छात्र एआई उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं। शिक्षकों के सर्वेक्षण भी इसी तरह एआई के प्रभाव के प्रति प्रबल अपेक्षाएं दर्शाते हैं।  

उन्होंने एआई ट्यूटर, अनुकूलित लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम और वैश्विक प्रथाओं पर चर्चा की। साथ ही संरचित प्रशिक्षण, शासन ढांचे और नैतिक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रो. खान द्वारा संचालित एआई कक्षा शिक्षण को कैसे बदल रहा है विषय पर पहले पैनल ने इस बात की पड़ताल की कि एआई किस प्रकार शिक्षकों की भूमिका को विषय-वस्तु प्रदान करने से बदलकर मार्गदर्शन और सलाह देने की ओर ले जा रहा है।  
कई पैनलिस्ट हुए शामिल

पहले पैनल में प्रो. गोपाल पाठक (महानिदेशक, सरला बिरला यूनिवर्सिटी), प्रो. अमित सचान (आईआईएम रांची), प्रो. एन. किशोर बाबू (ट्रिपल आईटी रांची), प्रो. सुदीप सहाना और प्रो. टीके बनर्जी (बीआइटी मेसरा), भगवती देवी (सीयूजे) और डा. मृत्युंजय मयंक (एनयूएसआरएल रांची) शामिल हुए।  

पैनलिस्टों ने एआई आधारित असाइनमेंट, रीयल-टाइम फीडबैक, बहुभाषी सहायता और प्रशासनिक स्वचालन पर प्रकाश डाला, साथ ही अत्यधिक निर्भरता, साहित्यिक चोरी, डेटा गोपनीयता जोखिम और एल्गोरिथम पूर्वाग्रह के प्रति आगाह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सहानुभूति, नैतिक निर्णय और मानवीय मार्गदर्शन अपरिहार्य हैं।
पैनल में विशेषज्ञों ने ये दिए विचार

प्रो. मनीष कुमार द्वारा संचालित दूसरे पैनल में डा. अभिषेक चौहान (सरला बिरला यूनिवर्सिटी), डॉ. अभिनव चक्रवर्ती (बीआइटी मेसरा), प्रो. अंबुज आनंद (आइआइएम रांची), डॉ. अमित कुमार सिंह (ट्रिपल आइटी रांची), डॉ. आनंद कुमार ठाकुर (रांची यूनिवर्सिटी), डॉ. संतोष चौधरी (सीयूजे) और डॉ. शांतनु चौबे (एनयूएसआरएल रांची) शामिल थे। इस पैनल का मुख्य विषय छात्रों के मूल्यांकन और आकलन में एआई का प्रभाव था।  

चर्चा स्मृति-आधारित परीक्षाओं से अनुप्रयोग-उन्मुख और सतत मूल्यांकन मॉडल की ओर संक्रमण पर केंद्रित थी। आईआईएम रांची के वर्किंग विद एआई असाइनमेंट को एआई के जिम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहित करने वाली एक प्रगतिशील पद्धति के रूप में उद्धृत किया गया।  

जहां एआई ग्रेडिंग में दक्षता बढ़ाता है, वहीं पैनलिस्टों ने अंतिम मूल्यांकन में पारदर्शिता, नैतिक निगरानी और मानवीय पर्यवेक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का समापन इस सामूहिक सहमति के साथ हुआ कि एआई अपरिहार्य और आवश्यक दोनों है, लेकिन इसका सार्थक एकीकरण जिम्मेदार शासन और प्रौद्योगिकी तथा मानवीय मूल्यों के बीच संतुलित तालमेल पर निर्भर करता है।
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