चंद्रग्रहण और होलिका दहन
संवाद सूत्र, मंडी धनौरा। इस वर्ष होलिका पूजन (पूर्णिमा) के दिन चंद्र ग्रहण पड़ने से धार्मिक गतिविधियों पर विशेष प्रभाव पड़ेगा। ग्रहण के कारण सुबह से ही सूतक काल प्रभावी रहेगा, जिसके चलते मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे व पूजा-अर्चना सहित सभी मांगलिक कार्य स्थगित रहेंगे। सूतक काल समाप्त होने के पूर्व व बाद में होली पूजन व अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।
इस साल तीन मार्च को होली का पूजन-दहन व चार मार्च को रंग खेला जाएगा। होली पूजन के दिन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण है। धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण के दिन ग्रहण नौ घंटे पूर्व सूतक काल शुरू हो जाता है। जिस कारण तीन मार्च को सूतक सुबह 6:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक प्रभावी रहेगा।
इस अवधि में मंदिरों में नियमित पूजा, आरती व प्रसाद वितरण नहीं किया जाएगा। मंदिर समितियां कपाट बंद रखकर ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण कर दर्शन प्रारंभ करेंगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। इसलिए होली का पूजन भी सूतक काल में नहीं करने की सलाह पुजारियों द्वारा दी जा रही है।
उनका कहना है कि सूतक के समय सभी धार्मिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। इसलिए होली का पूजन सूतक काल से पूर्व या बाद में होना चाहिए। इस दौरान दान-पुण्य, मंत्र जाप और ईश्वर स्मरण को शुभ माना गया है।
एक दिन पूर्व पूजन को लेकर शुरू करेगी व्यवस्था
होली समिति हर बार शहर में होलिका दहन की व्यवस्था की करती है। इसके लिए कई कुंतल लकड़ी होली पार्क में एकत्रित की जाती है। लेकिन इस बार तीन मार्च यानी पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण है व इसका सूतक भी लगेगा। इसलिए कमेटी एक दिन पूर्व दो मार्च को होली पूजन को लेकर व्यवस्थाएं पूर्ण करेगी।
कमेटी से जुड़े अधिवक्ता कपिल अग्रवाल ने बताया कि कमेटी एक दिन पूर्व दो मार्च को होली पार्क में सभी व्यवस्थाएं मुकम्मल करेगी। जबकि होलिका दहन का जुलूस 3 मार्च को अपने निर्धारित समय पर निकाल जाएगा।
बालाजी मंदिर के पुजारी दिनेश द्विवेदी ने बताया कि इस बार होली पूजन के दिन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण है। चंद्र ग्रहण का सूतक तीन मार्च को सुबह 06:20 से लग जायेगा और ग्रहण का मोक्ष शाम को 06: 47 पर होगा इस अवधि में मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। इसके बाद ही शुभ कार्य किए जाते हैं।
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