पासपोर्ट का निरस्त होने से खफा था राधेश्याम। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। गोरखनाथ मंदिर परिसर में रविवार रात सुरक्षाकर्मियों से उलझने वाले युवक की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं पाई गई है। पुलिस जांच में सामने आया कि पासपोर्ट आवेदन निरस्त होने से वह लंबे समय से तनाव में था और उसी मानसिक दबाव में उसने मंदिर गेट पर हंगामा कर दिया।
घटना रविवार रात करीब 8:30 बजे की है। बलिया के नगरा स्थित चंद्रवार दुगौली निवासी 35 वर्षीय राधेश्याम राजभर मंदिर के दक्षिणी गेट से अंदर गया। परिसर में दाखिल होने के बाद मंदिर कार्यालय की ओर जाने की कोशिश कर रहा था। ड्यूटी पर तैनात पीएसी जवान ने जब उसकी तलाशी और पूछताछ शुरू की तो वह उग्र हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक जोर-जोर से चिल्लाने लगा और सुरक्षाकर्मियों पर अनावश्यक रोकटोक का आरोप लगाने लगा। स्थिति बिगड़ती देख अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर बुलाया गया और युवक को पकड़कर गोरखनाथ थाने लाया गया। घटना के बाद मंदिर परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
असलहा छीनने जैसी अफवाहें भी फैल गईं, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई। युवक ने केवल धक्का-मुक्की और अभद्रता की थी, जिसे तत्काल नियंत्रित कर लिया गया।
थाने में पूछताछ के दौरान युवक ने बताया कि उसका पासपोर्ट आवेदन निरस्त हो गया है और वह इसी संबंध में प्रार्थना पत्र लेकर आया था। उसे उम्मीद थी कि मंदिर परिसर स्थित कार्यालय से कोई मदद मिल जाएगी। लेकिन कार्यालय बंद होने और अंदर जाने से रोके जाने पर वह आपा खो बैठा। पुलिस ने सीसी कैमरे के फुटेज खंगाले और मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों के बयान दर्ज किए। साथ ही युवक के परिजनों से संपर्क किया गया।
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छोटे भाई पवन राजभर ने बताया कि राधेश्याम पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से अस्थिर है और गोरखपुर के एक चिकित्सक के यहां उसकी दवा चल रही है। घर पर भी वह कई बार झगड़ा कर चुका है। यहां तक कि परिवार के साथ मारपीट की घटनाएं भी सामने आई हैं।
सीओ गोरखनाथ रवि कुमार सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया कि राधेश्याम पर मारपीट व आबकारी एक्ट का मुकदमा दर्ज है जिसकी वजह से उसका पासपोर्ट आवेदन निरस्त हुआ था। इसी बात को लेकर वह लंबे समय से तनाव में था। मानसिक स्थिति ठीक न होने पर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। शांति भंग की आशंका में उसका चालान कर विधिक कार्रवाई की गई है। |
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