संवाद सहयोगी, देवबंद (सहारनपुर)। दारुल उलूम देवबंद ने मुसलमानों से शकीली फिरके (समुदाय) के लोगों के बहकावे में न आने और इनसे सचेत रहने की अपील की है। उन्होंने इस बाबत मस्जिदों के इमामों और मजलिस तहाफ्फुज खत्म-ए-नबुअत (अंतिम पैगंबरी का संरक्षण करने वाला संगठन) के जिम्मेदारों को पत्र भी लिखा है।
दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि शकीली फिरके के लोग यानी शकील बिन हनीफ को मानने वाले लोग मस्जिदों और मुसलमानों की मजलिसों में पहुंचकर उन्हें बहकाने का काम कर रहे हैं, जो बेहद चिंता का विषय है। ऐसे लोगों से हमें बचने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों से यह बात सामने आ रही है कि रमजान के महीने में शकीली फिरके के लोग मस्जिदों में एतकाफ (एकांतवास) में बैठने वाले मुस्लिमों के बीच जाकर उन्हें बहकाते हैं और अपने जाल में फंसाने का काम करते हैं।
इसलिए सभी जिम्मेदारों को चाहिए कि वह ऐसे लोगों की पहचान करें और भोले-भाले लोगों को इनके बहकावे में आने से बचाएं। साथ ही एतकाफ में बैठने वाले या मजलिसों में पहुंचने वाले लोगों को इससे अवगत कराएं और उनसे बचने की सलाह दें।
कौन है शकील बिन हनीफ और क्या है शकीली फिरका
शकील बिन हनीफ बिहार के दरभंगा जिले का निवासी है। फिलहाल महाराष्ट्र के औरंगाबाद में अपने समर्थकों के साथ रहता है। शकील बिन हनीफ का समर्थन करने वाले लोगों की जमात शकीली फिरका कहलाती है। शकील बिन हनीफ स्वयं को इमाम मेहदी और ईसा मसीह होने का दावा करता है।
यह पिछले कई सालों से इस्लामी विद्वानों और मुसलमानों के निशाने पर है। दारुल उलूम देवबंद ने शकीली फिरके को लेकर पूर्व में फतवा भी जारी किया था, जिसमें इस फिरके के लोगों को इस्लाम के दायरे से बाहर बताया गया था। |
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