
नई दिल्ली: अमेरिका और वेनेजुएला से अब टैंकर भर-भरकर तेल भारत आने लगेगा। तेल रिफाइनरियों को केंद्र से इसकी खुली छूट मिल गई है। हाल में भारत और अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील में इस पर सहमति बनी थी। डील के मुताबिक भारत को रूसी तेल खरीदना बंद करना होगा और अमेरिका व वेनेजुएला से खरीद बढ़ानी होगी।इस डील के कुछ ही दिनों बाद भारत सरकार ने अपनी तेल रिफाइनरियों से कहा है कि वे अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने पर विचार करें। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत द्वारा रूसी कच्चा तेल खरीदने पर लगाए गए 25% के टैरिफ को हटा दिया है। हालांकि, एक कार्यकारी आदेश के अनुसार, अगर भारत रूसी कच्चा तेल खरीदना बंद नहीं करता है तो यह टैरिफ फिर से लगाया जा सकता है। भारत सरकार का कहना है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा उनकी खरीद के फैसलों को तय करेगी। वे कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाएंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सबसे अच्छी कीमत पर तेल खरीदेंगे। यही उनकी रणनीति रहेगी।ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अपनी सरकारी तेल रिफाइनरियों को अमेरिका और वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की संभावनाओं का मूल्यांकन करने के लिए कहा है। रिफाइनरी के अधिकारियों ने बताया कि कंपनियों को स्पॉट मार्केट की बोलियों में अमेरिकी कच्चे तेल को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। वेनेजुएला के कच्चे तेल के बारे में भी इसी तरह का सुझाव दिया गया है। हालांकि, ऐसी आपूर्ति खुले टेंडरों के बजाय व्यापारियों के साथ निजी बातचीत के माध्यम से की जाएगी।रिफाइनरी अधिकारियों ने बताया कि भारतीय प्रोसेसर सालाना लगभग 20 मिलियन टन अमेरिकी कच्चा तेल आयात कर सकते हैं। यह लगभग 4,00,000 बैरल प्रतिदिन है। इस स्तर पर भी, आयात पिछले साल की तुलना में ज्यादा होगा। केप्लर के अनुमान के अनुसार, पिछले साल दैनिक खरीद लगभग 2,25,000 बैरल थी।भारत सरकार का कहना है कि वे अपने देश की ऊर्जा सुरक्षा को सबसे ऊपर रखेंगे। वे कच्चे तेल के लिए अलग-अलग देशों से खरीद करेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में सबसे अच्छी कीमत पर तेल खरीदने की कोशिश करेंगे। यही उनकी रणनीति का मुख्य हिस्सा होगा। |