विशाखापत्तनम में नौसेना की पूर्वी कमान मुख्यालय में तैनात आईएनएस-नीलगिरी। जागरण
अंकुर अग्रवाल, विशाखापत्तनम। हिंद महासागर में अब वह दौर समाप्त हो चुका है, जब भारत केवल अपनी समुद्री सीमा की रखवाली करता था। आज भारत समुद्र में निर्णायक राष्ट्र-शक्ति बन चुका है। ऐसी शक्ति, जिसके कदमों की आहट से दुश्मन पनडुब्बियां भी सतर्क हो जाती हैं।
यह परिवर्तन किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि पिछले दस वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वदेशी रक्षा नीति, मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और समुद्री आत्मनिर्भरता पर केंद्रित दृष्टि का प्रत्यक्ष प्रभाव है।
नौसेना आज जिस तीव्रता से आधुनिक युद्धपोतों से सशक्त हो रही है, वह न केवल भारत के समुद्री इतिहास की रिकार्ड गति है, बल्कि विश्व की प्रमुख नौसैनिक शक्तियों को सीधी चुनौती भी है।
नौसेना की पूर्वी कमान के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी सुजीत रेड्डी के अनुसार, इस वर्ष दिसंबर तक हर 45 से 60 दिन में एक नया भारतीय युद्धपोत नौसेना को मिलने वाला है।
यह वही भारत है, जिसे कभी एक युद्धपोत के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ता था। स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट आइएनएस नीलगिरी और आइएनएस उदयगिरी इस नये भारत के प्रतीक हैं।
गुप्त, घातक और हर मौसम में तैयार रहने वाले उन्नत रडार, सेंसर, मिसाइल और इलेक्ट्रानिक युद्धक प्रणाली से लैस ये पोत दुश्मन की किसी भी छिपी हुई गतिविधि को पलक झपकते पकड़ लेते हैं।
नौसेना के कमांडिंग आफिसर विकास सूद के अनुसार, युद्धपोतों की इस भारी बढ़ोतरी से भारत को तीन निर्णायक राष्ट्रीय लाभ मिले हैं। हिंद महासागर में भारत की सतत उपस्थिति दर्ज होने के साथ अब भारत की नजर हर गतिविधि पर है।
चीन जैसी आक्रामक शक्तियों की चालों पर अभेद्य निगरानी के साथ विशाखापत्तनम से संचालित पनडुब्बी मिशन व निगरानी-जाल अब दुश्मनों को कदम-कदम पर रोकते हैं। यहीं से गहरे समुद्र के मिशन, त्वरित प्रहार और त्रिस्तरीय निगरानी तंत्र संचालित होता है।
गुरुवार को प्रेस सूचना ब्यूरो की ओर से उत्तराखंड के पत्रकारों के दल ने विशाखापत्तनम में नौसेना की क्षमता का अवलोकन किया और इस बढ़ते सामरिक आत्मविश्वास को प्रत्यक्ष महसूस किया।
नीलगिरी-उदयगिरी: भारत की छुपी हुई प्रहारक समुद्री शक्ति
प्रोजेक्ट-17ए के तहत विकसित अगली पीढ़ी के स्टेल्थ युद्धपोत आइएनएस-नीलगिरी व आइएनएस-उदयगिरी गुप्त संचालन समेत सतह, आकाश और गहराई, तीनों मोर्चों पर निर्णायक प्रहार क्षमता वाले स्वदेशी युद्धपोत हैं।
अत्याधुनिक सेंसर, रडार व इलेक्ट्रानिक युद्ध प्रणाली के साथ ही यह संकट राहत, खोज-बचाव और समुद्री सुरक्षा अभियानों में अत्यंत सक्षम बने हुए हैं।
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