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सरकार ने जारी किया नई सीरीज के तहत पहला मुद्रास्फीति डेटा, जनवरी में खुदरा महंगाई बढ़कर पहुंची 2.75%

Chikheang 3 hour(s) ago views 149
  

सरकार ने जारी किया नई सीरीज के तहत पहला महंगाई डेटा



नई दिल्ली। सरकार ने नई कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) सीरीज के तहत पहला महंगाई डेटा जारी कर दिया है। गुरुवार 12 फरवरी को घोषित डेटा के अनुसार, नई कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) सीरीज के तहत जनवरी 2026 में भारत की रिटेल महंगाई 2.75 प्रतिशत रही, जबकि उससे पिछले महीने में यह 1.33 प्रतिशत (पुरानी सीरीज के तहत) रही थी। यह डेटा एक दशक से ज्यादा समय में भारत की रिटेल महंगाई सीरीज में पहला बड़ा बदलाव है, जिसमें बेस ईयर 2012 से अपडेट करके 2024 किया गया है।
लगातार तीसरे महीने बढ़ी महंगाई

पिछले साल के आखिर में महंगाई बढ़ने लगी थी, जो पुरानी सीरीज के तहत एक महीने पहले के 0.71 फीसदी से दिसंबर में बढ़कर 1.33 फीसदी हो गई। अब नई सीरीज से पता चलता है कि महंगाई लगातार तीन महीनों से बढ़ रही हैं, क्योंकि इंडेक्स दिसंबर में 104.10 और नवंबर में 104.01 से बढ़कर जनवरी में 104.46 हो गया।
नई सीरीज में क्या है खास?

बदले हुए CPI इंडेक्स में एक बड़ा बदलाव यह है कि खाने की चीजों का वेटेज (हिस्सा) कम हो गया है। खाने की चीजों का वेटेज पहली बार 40 फीसदी से कम हो गया है। वहीं नॉन-फूड कैटेगरी अब इंडेक्स में 60 फीसदी से अधिक हैं, जो पहले लगभग 45 फीसदी था। साथ ही, ग्रामीण खपत को ज्यादा असरदार वजन दिया गया है, जो कुल मांग में इसके बढ़ते योगदान को दिखाता है।
कितनी रही खाद्य महंगाई?

रिवाइज्ड यानी नई सीरीज के तहत फूड इन्फ्लेशन बढ़कर 2.13 फीसदी हो गया। हालांकि कम वेटेज की वजह से हेडलाइन इन्फ्लेशन पर इसका कुल असर पिछली सीरीज के मुकाबले कम रहने की उम्मीद है। एक और बदलाव ये है कि नए CPI बास्केट में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिसमें पहले के 299 आइटम के मुकाबले 350 से ज्यादा आइटम शामिल हैं।
नए जोड़े गए आइटम में AirPods जैसे वायरलेस ईयरफोन, पेट फूड, सैनिटाइजर, फिटनेस बैंड और एयर प्यूरीफायर शामिल हैं। ये चीजें शहरीकरण, अधिक खर्च करने योग्य इनकम और महामारी के बाद हेल्थ अवेयरनेस से बदलते कंजम्पशन पैटर्न को समझने के लिए शामिल की गई हैं।
कैटेगरी का वेटेज भी बदला

कैटेगरी का वेटेज भी बदल गया है। हाउसिंग, पानी, बिजली, गैस और दूसरे फ्यूल अब इंडेक्स में 17.7 फीसदी हैं, जो पहले 16.9 फीसदी था। हेल्थ सर्विसेज 5.9 फीसदी से बढ़कर 6.1 फीसदी हो गई हैं, जबकि ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन 8.6 फीसदी से तेजी से बढ़कर 12.4 फीसदी हो गए हैं, जो बढ़ी हुई मोबिलिटी, डिजिटल कनेक्टिविटी और सर्विस के इस्तेमाल को दिखाता है।

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