नई दिल्ली : संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने गुरुवार को सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2026 के लिए अधिसूचना जारी कर दी। इस बार की अधिसूचना कई अहम बदलावों के कारण चर्चा में है। आयोग ने विशेष रूप से पहले से चयनित या नियुक्त अधिकारियों के लिए पात्रता संबंधी नियमों को स्पष्ट और कड़ा किया है। साथ ही परीक्षा केंद्रों पर चेहरा प्रमाणीकरण (फेस ऑथेंटिकेशन) को अनिवार्य कर दिया गया है। देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में शामिल सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय विदेश सेवा (IFS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। यह परीक्षा हर वर्ष तीन चरणों प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार में आयोजित होती है।
आईएएस और आईएफएस के लिए नई पाबंदी
यूपीएससी ने स्पष्ट किया है कि जो उम्मीदवार पहले से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) या भारतीय विदेश सेवा (IFS) में कार्यरत हैं, वे सिविल सेवा परीक्षा 2026 में शामिल होने के पात्र नहीं होंगे। यदि कोई उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा देने के बाद IAS या IFS में नियुक्त हो जाता है, तो भले ही उसने प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर ली हो, वह मुख्य परीक्षा में बैठने का पात्र नहीं रहेगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि मुख्य परीक्षा शुरू होने के बाद लेकिन परिणाम घोषित होने से पहले किसी उम्मीदवार की नियुक्ति IAS या IFS में हो जाती है, तो उसके नाम पर किसी भी सेवा के लिए विचार नहीं किया जाएगा। इन प्रावधानों को सेवा में स्थिरता और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आईपीएस और समूह ‘ए’ सेवाओं के लिए प्रावधान
अधिसूचना के अनुसार, जो उम्मीदवार पहले से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयनित हैं, वे सिविल सेवा परीक्षा 2026 के माध्यम से उसी सेवा में दोबारा प्रवेश के पात्र नहीं होंगे। हालांकि, सिविल सेवा परीक्षा 2026 के जरिए IPS या केंद्रीय सेवा समूह ‘ए’ में चयनित उम्मीदवारों को एक विशेष छूट दी गई है। यदि वे संबंधित अधिकारी से प्रशिक्षण में शामिल होने से एक बार की छूट प्राप्त करते हैं, तो वे अगले वर्ष की परीक्षा में बैठने का विकल्प चुन सकते हैं। इस प्रावधान का उद्देश्य उन अभ्यर्थियों को अवसर देना है जो बेहतर रैंक या अन्य सेवा के लिए पुनः प्रयास करना चाहते हैं, लेकिन साथ ही चयनित सेवाओं की कार्यप्रणाली में अनावश्यक व्यवधान भी न हो।
24 मई को होगी प्रारंभिक परीक्षा
सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 24 मई 2026 को आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा वस्तुनिष्ठ प्रकार की होती है और इसमें दो प्रश्नपत्र शामिल होते हैं। प्रारंभिक परीक्षा में सफल अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए पात्र होते हैं, जिसके बाद साक्षात्कार चरण आता है। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करें और परीक्षा से संबंधित दिशा-निर्देशों का सावधानीपूर्वक पालन करें।
933 रिक्तियों की घोषणा
यूपीएससी ने सिविल सेवा परीक्षा 2026 के लिए कुल 933 रिक्तियों की घोषणा की है। इनमें से 33 पद विशेष दिव्यांगता वाले अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित हैं। ये रिक्तियां विभिन्न अखिल भारतीय सेवाओं और केंद्रीय सेवाओं में भरी जाएंगी। हालांकि अंतिम रिक्तियों की संख्या में परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन संभव है।
परीक्षा केंद्रों पर चेहरा प्रमाणीकरण अनिवार्य
इस वर्ष से परीक्षा केंद्रों पर सभी अभ्यर्थियों के लिए चेहरा प्रमाणीकरण (फेस रिकग्निशन) अनिवार्य कर दिया गया है। आयोग ने कहा है कि सुरक्षित और सुचारु परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचें, ताकि चेहरे की पहचान/सत्यापन और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी हो सके। आयोग ने यह भी सुझाव दिया है कि पहचान और अन्य विवरणों के सहज सत्यापन के लिए अभ्यर्थी अपने आधार कार्ड का उपयोग पहचान पत्र के रूप में करें। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी सत्यापन की यह व्यवस्था परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत करेगी।
परीक्षा की संरचना और महत्व
सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर वर्ष लाखों अभ्यर्थी इसमें आवेदन करते हैं, लेकिन अंतिम चयन कुछ सौ उम्मीदवारों का ही होता है। तीन चरणों वाली इस प्रक्रिया में प्रारंभिक परीक्षा के बाद मुख्य परीक्षा और अंत में व्यक्तित्व परीक्षण (साक्षात्कार) होता है। अंतिम मेरिट सूची मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की जाती है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
यूपीएससी द्वारा जारी नई अधिसूचना से स्पष्ट है कि आयोग चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने पर जोर दे रहा है। सेवा में पहले से कार्यरत अधिकारियों के लिए स्पष्ट पात्रता मानदंड और चेहरा प्रमाणीकरण जैसी तकनीकी व्यवस्था इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। इन बदलावों को लेकर अभ्यर्थियों के बीच चर्चा तेज है। जहां कुछ उम्मीदवार इसे चयन प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और निष्पक्ष बनाने वाला कदम मान रहे हैं, वहीं कुछ का कहना है कि सेवा में रहते हुए दोबारा प्रयास की सीमाएं सख्त कर दी गई हैं।
लाखों युवाओं के सपनों और करियर
अब अभ्यर्थियों का ध्यान आवेदन प्रक्रिया पूरी करने और 24 मई को होने वाली प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी पर है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि उम्मीदवार अधिसूचना में दिए गए सभी दिशा-निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ें और पात्रता संबंधी प्रावधानों को अच्छी तरह समझ लें, ताकि किसी भी स्तर पर तकनीकी कारणों से अयोग्यता की स्थिति न बने। कुल मिलाकर, सिविल सेवा परीक्षा 2026 की अधिसूचना ने नियमों में किए गए बदलावों के कारण व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। यह परीक्षा न केवल प्रशासनिक नेतृत्व के चयन का माध्यम है, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों और करियर का आधार भी है।

Editorial Team
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