प्रतीकात्मक फोटो।
संवाद सूत्र, सम्मनपुर। किसानों ने गेहूं के फसल में दूसरी सिंचाई शुरू कर दी है। ऐसे समय पर माइनरें सूखी पड़ी है। फसलों की सिंचाई को लेकर किसान चिंतित हैं। उन्हें निजी संसाधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। बीते दिनों से तापमान में वृद्धि से खेतों की नमी सूखने लगी है। पहले सिंचाई कर चुके किसानों के खेतों में पानी की सख्त जरूरत है।
अधिकांश किसानों ने गेहूं के फसल में दूसरी सिंचाई शुरू कर दिया है। ऐसे समय में माइनरों में पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। क्षेत्र की केशवपुर, अमरौला, मजीसा व सुलेमपुर आदि माइनरें सूखी पड़ी है। अधिकांश किसानों के खेतों की सिंचाई इन्हीं माइनरों पर निर्भर है।
पानी की कमी से किसान मायूस
पानी की आपूर्ति न होने से किसान मायूस हैं। उन्हें निजी संसाधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। मुबारकपुर के संतोष चौधरी ने कहा कि खेत की नमी सूखने से दूसरी सिंचाई शुरू कर दी है।
माइनर में पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। माइनर से मुफ्त सिंचाई का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है। असौवापार मोहरई गांव के किसान पंकज चौधरी ने बताया कि जब भी फसलों को पानी की जरूरत होती है, माइनरें सूखी होती है। जैतपुर ईश्वरपुर के किसान अरविंद त्रिपाठी कहते हैं कि उन्हें कभी भी माइनर का लाभ नहीं मिलता। इसमें जब भी पानी की आपूर्ति होती है। नुकसान ही होता है। गयासपुर मालीपुर के किसान हरीराम पाल ने कहा कि माइनर के पास ही खेत हैं, लेकिन हमेशा सिंचाई निजी संसाधनों के सहारे ही करनी पड़ती है।
मुख्य कैनाल में अभी पानी नहीं है। पानी की आपूर्ति अभी हाल ही में बंद हुई है। माइनरों में पानी की आपूर्ति करीब 10 दिन के बाद ही होगी। -आमिर जैद खान, अवर अभियंता, नहर विभाग |