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जागरण संवाददाता, गोरखपुर। केन्द्रीय श्रमायुक्त के समक्ष इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आइबीए), वित्त मंत्रालय और यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के बीच 22 और 23 जनवरी को हुई मैराथन वार्ता विफल हो गई है। पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की प्रमुख मांग पर कोई सहमति नहीं बनने के बाद यूएफबीयू ने 27 जनवरी 2026 को अखिल भारतीय बैंक हड़ताल का ऐलान कर दिया है। इस हड़ताल में सार्वजनिक, निजी, विदेशी, क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंकों में कार्यरत करीब आठ लाख बैंक अधिकारी और कर्मचारी शामिल होंगे।
हड़ताल के चलते बैंकिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहने की आशंका है। नकद निकासी, चेक क्लियरेंस, शाखा स्तर के लेनदेन और ऋण से जुड़े कार्य ठप रह सकते हैं। यूएफबीयू के अनुसार, 24 जनवरी (शनिवार) और 25 जनवरी (रविवार) 26 जनवरी ( गणतंत्र दिवस) के अवकाश के बाद 27 जनवरी को हड़ताल होने से बैंक लगातार चार दिन बंद रहेंगे, जिससे आम उपभोक्ताओं और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ेगा।
आल इंडिया बैंक आफिसर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव डीएन त्रिवेदी ने बताया कि 7 दिसंबर 2023 के समझौता ज्ञापन और 8 मार्च 2024 के संयुक्त नोट में सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 40 मिनट कार्य समय बढ़ाकर शेष सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करने पर सहमति बनी थी, लेकिन सरकार की मंजूरी अब तक नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी 2015 के 10वें द्विपक्षीय समझौते के बाद दूसरे और चौथे शनिवार की छुट्टी लागू की गई थी।
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यूएफबीयू गोरखपुर के समन्वयक यूपीएन सिंह ने कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक, एलआइसी और जनरल इंश्योरेंस कारपोरेशन सहित कई वित्तीय संस्थानों में पहले से पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है। सरकार के स्तर पर हो रही देरी से वे भेदभाव महसूस कर रहे हैं और यह हड़ताल उन पर थोपी गई है। |