search
 Forgot password?
 Register now
search

गोरखपुर साइबर ठगी: अमेरिका तक फैले नेटवर्क में अलग-अलग स्तर पर बंटी थी जिम्मेदारी, बेरोजगारों को बनाया ठगी के खेल का मोहरा

Chikheang 3 hour(s) ago views 834
  

पुलिस लाइन में प्रेस वार्ता करते एसपी उत्तरी ज्ञानेंद्र साथ में एसपी क्राइम व सीओ कैंपियरगंज। जागरण  



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। अमेरिका तक फैले साइबर ठगी के नेटवर्क में सदस्यों की जिम्मेदारी अलग-अलग स्तर पर बंटी थी। जांच में सामने आया कि काल सेंटर में काम करने वाले युवक और युवतियों को ठगी की जानकारी नहीं थी।

उन्हें सीमित भूमिका में रखा गया, तय स्क्रिप्ट के अनुसार ठगी के इस खेल में उन्हें मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस कार्रवाई के बाद अब इस नेटवर्क की आंतरिक कार्यप्रणाली उजागर हो रही है, जिसमें बेरोजगारी का फायदा उठाकर युवाओं को जाल में फंसाने की बात सामने आई।

सीओ कैंपियरगंज अनुराग सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया है कि ‘ग्लोब सोल्यूशन’ नाम से चल रहे काल सेंटर में भर्ती के समय युवाओं को विदेशी कालिंग और कस्टमर सपोर्ट का काम बताया गया था। अधिकांश युवक-युवतियां गोरखपुर, कुशीनगर,देवरिया,महराजगंज जिले के रहने वाले थे। जिन्हें 10 से 15 हजार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर रखा गया।

काम के दौरान उन्हें केवल इतना निर्देश दिया जाता था कि तय स्क्रिप्ट के अनुसार बात करनी है। अगर कोई योजना का लाभ लेने का इच्छुक है तो काल को अमेरिकी कंपनी इवोल्व टेक इनोवेशन व एडवांस ग्रो मीडिया के कार्यालय में फारवर्ड कर देते थे। आगे क्या हो रहा है, इसकी जानकारी एजेंट को नहीं दी जाती थी। कॉल सेंटर में हर कर्मचारी के लिए फर्जी अमेरिकी नाम तय था।

यह भी पढ़ें- अमेरिकी नागरिकों से ठगी का साइबर रैकेट, सिलीगुड़ी-कोलकाता से होता था संचालन

स्क्रीन पर पहले से तैयार स्क्रिप्ट चलती रहती थी, जिसमें बातचीत की पूरी रूपरेखा होती थी। एजेंट को सिर्फ पढ़ना और सामने वाले को भरोसे में लेना होता था। पुलिस के अनुसार कालिंग के लिए एप आधारित सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे काल का स्रोत ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था।

हर शिफ्ट में तय लक्ष्य दिए जाते थे और काल की संख्या के आधार पर दबाव बनाया जाता था। शाम सात बजे से भोर चार बजे तक चलने वाली नाइट शिफ्ट में युवाओं से लगातार काल कराई जाती थीं। साइबर सेल कर्मचारियों के मोबाइल, काल लाग और चैट रिकार्ड की भी जांच कर रही है।

ई-मेल से भेजते थे अमेरिकी नागरिको का डाटा
जांच में पता चला है कि अमेरिका में बैठा गिरोह का सदस्य स्थानीय नागरिकों का डाटा जुटाता था। इस डाटा में उम्रदराज लोग और सरकारी योजनाओं से जुड़े नागरिक प्राथमिक लक्ष्य होते थे। इस डाटा को ईमेल के जरिए कोलकाता में स्थित कंट्रोल रूम में भेजा जहां से जहां से इसे सेंटर संचालक को दिया जाता था। काल सेंटर में मौजूद एजेंटों को यह बताया जाता था कि किस वर्ग के लोगों से कैसे बात करनी है।
like (0)
ChikheangForum Veteran

Post a reply

loginto write comments
Chikheang

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1510K

Credits

Forum Veteran

Credits
156743

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com