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जागरण संवाददाता, रामपुर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां के विरुद्ध क्वालिटी बार की जगह कब्जाने के मामले में अधिवक्ताओं के कार्य न करने से सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले में छह फरवरी को सुनवाई होगी।
आजम खां व अन्य के खिलाफ बीपी कालोनी निवासी गगन लाल अरोड़ा ने सिविल लाइंस कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। वह विकास भवन के निकट जिला सहकारी विकास संघ (डीसीडीएफ) की दुकान में क्वालिटी बार चलाते थे।
उनके मुताबिक डीसीडीएफ की दुकान करीब 60 साल से उनके परिवार के पास थी, जिसका 2820 रुपये प्रति वर्ष की दर से किराया डीसीडीएफ में जमा किया जाता था। उनके द्वारा 31 सितंबर 2013 तक किराया जमा कर दिया गया था। 2013 में प्रदेश में सपा की सरकार थी और आजम खां मंत्री थे।
पुलिस विभाग उनके इशारे पर काम करता था। आरोप है कि 13 फरवरी 2013 को आजम खां के साथ सेवानिवृत्त सीओ आले हसन खां (घटना के समय सिविल लाइंस कोतवाली प्रभारी), जिला सहकारी बैंक के तत्कालीन चेयरमैन मास्टर जाफर और डीसीडीएफ के तत्कालीन सचिव कामिल खां दुकान पर आए। उनके साथ सिविल लाइंस कोतवाली की पुलिस फोर्स भी थी।
उन्होंने आते ही दुकान का सामान फेंकना शुरू कर दिया। गल्ले में रखे 16500 रुपये भी लूट लिए थे। जबरन उनकी दुकान को खाली कर बाद में आजम खां की पत्नी के नाम आवंटित कर दिया गया था। पुलिस ने उल्टा उनके ऊपर ही धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया था।
उन्हें इस मामले में जमानत करानी पड़ी थी। वर्ष 2019 में भाजपा सरकार आने पर पुलिस ने उनकी ओर से प्राथमिकी दर्ज की थी।
पुलिस ने जांच कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था, जिसमें आजम खां की पत्नी डा. तजीन फात्मा व बेटे अब्दुल्ला को भी आरोपित बनाया। इस मुकदमे की सुनवाई एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) में चल रही है। इसमें वादी मुकदमा की गवाही होनी है। |
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