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जिया उर रहमान बर्क
संवाद सहयोगी, जागरण, बहजोई (संभल)। संभल हिंसा के बाद से विकास की रफ्तार जिस तरह थमी हुई है, उसने यह साफ कर दिया है कि समस्या केवल हालात की नहीं बल्कि प्रतिनिधित्व की सक्रियता की भी है। खाते में करीब 10 करोड़ रुपये उपलब्ध होने के बावजूद धरातल पर विकास कार्य नजर नहीं आ रहे। जरूरतें लगातार सामने हैं, लेकिन प्रस्ताव सीमित हैं और प्राथमिकताएं सवालों के घेरे में हैं।
दरअसल, लोकसभा संभल से जिया उर रहमान बर्क सपा के सांसद हैं और नवंबर 2024 में संभल में हुई हिंसा के बाद सांसद विकास निधि से होने वाले विकास कार्य लगभग पूरी तरह ठप पड़े हुए हैं। स्थिति यह है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत सांसद निधि से प्राप्त धनराशि अब तक खर्च नहीं हो सकी और खातों में पड़ी रही।
कुल मिलाकर 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का उपयोग नहीं हो पाया। संभल लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत कुल पांच विधानसभा आती हैं, जिनमें मुरादाबाद जिले की कुंदरकी और बिलारी विधानसभा शामिल हैं, जबकि जनपद की असमोली, चंदौसी और संभल विधानसभा भी इसी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं।
सांसद निधि की लगभग 50 प्रतिशत धनराशि मुरादाबाद जिले की कुंदरकी और बिलारी विधानसभा के लिए भेज दी गई, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि असमोली, चंदौसी और संभल विधानसभा के लिए ही रह गई, जबकि यह अनुपात संभल जिले के 60 और मुरादाबाद जिले के 40 प्रतिशत होता है।
जहां विकास कार्यों की मांग लगातार उठती रही, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ सके। सवाल लगातार उठ रहे हैं कि जब बुनियादी ढांचा, सड़क, नाली और अन्य आवश्यक विकास कार्य प्राथमिकता में होने चाहिए, तब प्रस्ताव इतने सीमित क्यों रखे गए। बताया जा रहा है कि सांसद निधि के अंतर्गत भेजे गए करीब 88 प्रस्ताव अभी भी स्वीकृति की प्रक्रिया में अटके हुए हैं।
ऐसे में सांसद निधि के प्रभावी उपयोग को लेकर सांसद की शिथिलता और प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसका सीधा असर क्षेत्र के विकास पर पड़ता दिखाई दे रहा है। इस संबंध में सांसद से बात करने का प्रयास किया मगर, उनका काल रिसीव नहीं हो पाया।
बढ़ा दबाव तब एक वर्ष पर दिए विकास कार्यों के प्रस्ताव
करीब एक माह पूर्व जब सांसद निधि से जुड़े विकास कार्यों को लेकर दबाव बढ़ा, तब सांसद की ओर से कुछ नए प्रस्ताव संबंधित विभागों को भेजे गए। इन प्रस्तावों के अनुसार 63 स्थानों पर स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए लगभग 1.82 करोड़ रुपये, 18 स्थानों पर शीतल जल प्याऊ लगवाने और 53 स्थानों पर वाटर प्लांट स्थापित करने के लिए करीब 1.35 करोड़ रुपये के प्रस्ताव दिए गए।
इसके अलावा पूरे जनपद में केवल चार सड़कों के लिए लगभग 0.43 करोड़ रुपये खर्च का प्रस्ताव भेजा गया। इस तरह कुल मिलाकर केवल 3.59 करोड़ रुपये के विकास प्रस्ताव ही सामने आए हैं, जबकि शेष करोड़ों रुपये अब भी उपयोग की प्रतीक्षा में हैं।
सांसद द्वारा जो भी प्रस्ताव भेजा जाता है। उसको प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत कर आगे बढ़ाया जाता है। हमारे स्तर पर कोई भी प्रस्ताव नहीं रूकता है।
- डा. राजेंद्र पैंसिया, डीएम, संभल।
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