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Basant Panchami 2026: वसंत पंचमी स्नान का महत्व। (Ai Generated Image)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में वसंत पंचमी का दिन केवल विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का भी बहुत ज्यादा महत्व है। आज के दिन वसंत स्नान भी किया जा रहा है। विशेषकर प्रयागराज, हरिद्वार और काशी जैसे तीर्थ स्थलों पर इस दिन भारी संख्या में लोग गंगा और संगम में डुबकी लगाते हैं। ऐसा माना जाता है कि वसंत पंचमी के दिन (Basant Panchami 2026) किया गया स्नान व्यक्ति के सभी पापों का नाश करता है और आरोग्य प्रदान करता है। आइए इस आर्टिकल में इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं -
वसंत पंचमी स्नान का धार्मिक महत्व (Basant Panchami 2026 Significance)
- वसंत पंचमी के दिन स्नान-दान का बड़ा महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा का संचार सबसे अधिक होता है।
- वसंत पंचमी माघ महीने के दौरान आती है। शास्त्रों के अनुसार, माघ में पवित्र नदियों में स्नान करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्टों का अंत होता है।
- यह स्नान केवल शरीर की शुद्धि नहीं, बल्कि मन की नकारात्मकता को भी दूर करता है।
- इस दिन पवित्र स्नान के बाद दान-पुण्य करने से कुंडली में बृहस्पति और चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है।
स्नान के नियम (Basant Panchami Snan Vidhi)
- वसंत पंचमी के दिन सूर्योदय से पूर्व या सूर्योदय के समय स्नान करना सबसे उत्तम माना जाता है। इस समय को अमृत बेला कहा जाता है।
- अगर आप पवित्र नदी तक नहीं जा सकते, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करें।
- स्नान के बाद पीले कपड़े पहनें, क्योंकि पीला रंग मां सरस्वती और वसंत ऋतु का प्रतीक है।
- स्नान करते समय \“ॐ नमो नारायणाय\“ या \“गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती\“ मंत्र का जप करें।
स्नान के बाद क्या करें? (Basant Panchami 2026 Daan Significance)
हिंदू धर्म में स्नान तभी पूरा माना जाता है, जब उसके बाद तर्पण और दान किया जाए। ऐसे में स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और फिर मां सरस्वती की विधिवत पूजा करें। इस दिन दान का भी विशेष महत्व है। इसलिए गरीबों को पीले अनाज, वस्त्र और शिक्षा की सामग्री दान करें। ऐसा करने से जीवन में यश और कीर्ति आती है।
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