कुशाग्र हत्याकांड मामले में सजा सुनाए जाने के बाद दोषी रचिता वत्स को जेल ले जातीं महिला पुलिस कर्मी। जागरण
जागरण संवाददाता, कानपुर। हाईस्कूल के छात्र 17 वर्षीय कुशाग्र के हत्यारों को गुरुवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसी दिन दिवंगत के पिता मनीष कनोडिया का जन्मदिन होता है। बेटे के हत्यारों को सजा सुनाने के बाद परिवार फफक पड़ा। मां के आंसू निकल रहे तो पिता की भी पलकें भीगी थीं। कोर्ट के इस फैसले से कोई संतुष्ट नहीं था। माता-पिता व चाचा ने हत्यारों को फांसी देने की मांग की है।
\“जिस तरह से हत्यारों ने मेरे मासूम बच्चे को मारा उन्हें वैसे ही फांसी का दंड मिले\“
दिवंगत कुशाग्र के पिता ने कहा कि कोर्ट ने अपने अनुसार से सजा तय कर दी है, लेकिन वह इस सजा से संतुष्ट नहीं हैं। वह चाहते हैं कि जिस तरह से उन हत्यारों मेरे मासूम बच्चे को मारा है। उनको वैसा ही दंड कोर्ट और सरकार के माध्यम से मिलना चाहिए। ताकि कोई ऐसा काम करने से पहले 100 बार सोचे। उन्हें फांसी का दंड मिले। कोर्ट में उन तीनाें का चेहरा तक नहीं देखा, जब तक तीनों को फांसी नहीं मिलेगी। हमें संतुष्टि नहीं मिलेगी।
\“जैसे मेरे बच्चे का गला घोंटकर मारा है वैसे ही इन तीनों का गला दबना चाहिए\“
कुशाग्र की मां सोनिया कनोडिया ने कहा कि उन तीनों को फांसी होनी चाहिए। वह सजा से संतुष्ट नहीं हैं। जैसे उन लोगों ने मेरे बच्चे को गला घाेंटकर मारा है। वैसे ही इन तीनों का भी गला दबना चाहिए। उन तीनों को बच्चे की हत्या का कोई मलाल नहीं है। बस उन्होंने अपना जुर्म कबूल किया है। वे लोग बहुत गंदे हैं। रचिता ने टीचर के नाम पर कलंक लगाया है। उन तीनों को न कोई अफसोस और न शर्म है कि कितना बड़ा कांड किया है। उन तीनों का फांसी होनी चाहिए।
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\“दोषियों में एक का तो गला घोटा जाना चाहिए\“
कुशाग्र के चाचा सुमित कनोडिया ने कहा कि कोर्ट ने बहुत तेज प्रक्रिया से केस को बढ़ाया है। मगर हमारे भतीजे का गला घोंटा गया था। उसे बहुत दर्द हुआ था। जिस तरह से 40 मिनट तक कुशाग्र के साथ प्रभात था और उसका गला घोंटा था। वैसे ही तीनों में से एक का गला घोंटा जाना चाहिए।
जितनी देर वह भंडरिया में कुशाग्र के साथ प्रभात भंडरिया में रहा है। भतीजा जिस तरह से तड़पा था। वैसे ही इसमें से एक का गला घोंटा जाना चाहिए। उन्हें फांसी होनी चाहिए। इसके लिए हमलोग परिवार और वकील से राय करेंगे। राय में बात बनेगी तो अपील में जाएंगे। न्यायालय का बहुत बहुत धन्यवाद। आजीवन कारावास देकर ये साबित किया कि न्याय में देरी हो सकती है लेकिन अन्याय नहीं हो सकता है। |
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