खाने के बैग में छिपाकर पिस्टल सप्लाई करने वाली बुजुर्ग महिला गिरफ्तार। एआई इमेज
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गणतंत्र दिवस समारोह की चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के दौरान 67 वर्षीय बुजुर्ग महिला रामबीरी उर्फ चाची को अवैध हथियारों की तस्करी के आरोप में गिरफ़्तार किया है। उसके पास से खरगोन निर्मित चार अत्याधुनिक पिस्टल व तीन अतिरिक्त मैग्जीन बरामद की है। वह अपने खाने के बैग में पिस्टल रखकर बदमाशों को अवैध हथियार आपूर्ति करती थी।
शकूर बस्ती के पास हुई गिरफ्तारी
स्पेशल सेल के एक अधिकारी के मुताबिक, उसे बुधवार को शकूर बस्ती रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया गया। वह मध्य प्रदेश के खरगोन से हथियारों की खेप लेकर दिल्ली लौट रही थी। तलाशी के दौरान उसके सामान से चार अत्याधुनिक पिस्टल और तीन मैग्जीन बरामद हुईं।
सफर में बनी रहती थी साधारण
पुलिस का कहना है कि रामबीरी का सबसे बड़ा हथियार उसका साधारण जीवन था। वह न ज्यादा कपड़े रखती थी, न कोई भारी बैग। सफर के दौरान सिर्फ चार पराठे और एक बोतल पानी साथ रखती थी ताकि उसे स्टेशन पर उतरकर खाने या पानी के बहाने रुकना न पड़े। रामबीरी कभी भी ट्रेन में रिजर्वेशन नहीं कराती थी। वह हमेशा भीड़भाड़ वाले जनरल कोच में सफर करती थी। बुजुर्ग महिला होने के कारण किसी को उसपर शक नहीं होता था। वह मेरठ से इंदौर और इंदौर से दिल्ली तक बेखौफ आवाजाही करती थी।
पति की मौत के बाद आया परिवार का भार
पुलिस का कहना है कि रामबीरी का शुरुआती जीवन अपराध से कोसों दूर था। वह हस्तिनापुर के पास एक छोटे से कस्बे में पली-बढ़ीं। 2003 में पति की मौत हो गई। तीन बच्चों की जिम्मेदारी के साथ वह मायके लौट आईं। यहीं से उसकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने उसे अपराध की दुनिया में धकेल दिया।
12 साल छोटे लुटेरे बलजिंदर से करीबी
मायके में रहते हुए उसका संपर्क बलजिंदर नाम के युवक से हुआ, जो उसके माता-पिता के घर किराये पर रहता था। परिवार को नहीं पता था कि वह एक लुटेरा है। 2005 में राजस्थान पुलिस ने उसके घर से बलजिंदर को गिरफ्तार किया। कुछ समय बाद वह जेल से बाहर आने के बाद दोबारा रामबीरी के संपर्क में आया। उम्र में 12 साल छोटा बलजिंदर धीरे-धीरे उसकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया।
जेल में अपराधी पुकारने लगे चाची
पुलिस का कहना है कि बलजिंदर के साथ रामबीरी भी अपराध की राह पकड़ ली। 2008 में गुरुग्राम और हरिद्वार में हुई बैंक डकैतियों में वह शामिल रही। हरिद्वार की वारदात में रामबीरी कार में बाहर बैठकर गिरोह का इंतजार कर रही थी। 2009 में दिल्ली के कमला मार्केट इलाके में बैंक लूट की एक और कोशिश में उसका नाम सामने आया। उसी साल उसे मकोका के तहत गिरफ्तार किया गया। बलजिंदर भी उसी दौरान दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा। रामबीरी 2017 तक तिहाड़ जेल में बंद रही। जेल में उसकी पहचान \“चाची\“ के नाम से बनी।
तिहाड़ जेल में मिला हथियार सप्लायर
तिहाड़ जेल में ही रामबीरी की मुलाकात सोनू नाम के एक हथियार सप्लायर से हुई। यहीं से उसके जीवन में नया अपराध जुड़ा अवैध हथियारों की तस्करी। जेल से छूटने के बाद भी वह पुराने संपर्कों में बनी रही। 2023 की शुरुआत से उसने मध्य प्रदेश के खरगोन से अवैध हथियारों की सप्लाई शुरू कर दी।
कोड वर्ड मिलने के बाद सौंपती हथियार
जांच में सामने आया है कि इंदौर पहुंचने के बाद कोड वर्ड के जरिए उसे हथियारों की खेप सौंपी जाती थी। रेलवे स्टेशन पर लगेज चेकिंग न होने का फायदा उठाकर वह बिना रोकटोक दिल्ली लौट आती थी। यहां उसे बताया जाता था कि हथियार कहां पहुंचाने हैं। हर खेप के बदले उसे 10 हजार रुपये मिलते थे। रामबीरी ने कबूल किया है कि डेढ़ साल में वह चार बार इंदौर गई और 30 पिस्टल सप्लाई की।
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