जागरण संवाददाता, मैनपुरी। बिजली विभाग की विजिलेंस टीम पर जांच के नाम पर मनमानी के आरोप लगते रहे हैं। मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए अब उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने सख्ती की तैयारी कर ली है। विजिलेंस टीम को बाडी वार्न कैमरे लगाकर ही जांच करनी होगी। हर जांच प्रक्रिया की रिकार्डिंग सुरक्षित रखनी होगी। पूरी प्रक्रिया की निगरानी विभाग के बड़े अधिकारियों द्वारा की जाएगी।
बिजली चोरी से संबंधित प्रकरण की जांच के लिए यूपीपीसीएल द्वारा अलग से विजिलेंस टीम का गठन किया गया था। इसमें पुलिस की टीम के साथ अवर अभियंता स्तर के अधिकारी को नोडल बनाया गया है। निरंतर ये आरोप लगते रहे हैं कि विभागीय टीम द्वारा चेकिंग के नाम पर मनमानी की जा रही है। कई बार जांच में आरोप सही भी मिले थे। विवादित स्थिति न बने, इसके लिए अब यूपीपीसीएल ने बाडी वार्न कैमरों की व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया है।
जांच के दौरान टीम के अधिकारी और सदस्यों को अनिवार्य रूप से कैमरे कंधों पर ऐसे स्थान पर लगाने होंगे, जहां से कार्यवाही की संपूर्ण प्रक्रिया स्पष्ट रूप से रिकार्ड हो सके। इस रिकार्डिंग को टीम के अधिकारियों को सुरक्षित रखना होगा। विभाग के बड़े अधिकारियों द्वारा पूरी निगरानी कराई जाएगी।
यह निर्धारित किए हैं मानक
- मास रेड की विजिलेंस की कार्यवाही में उप निरीक्षक कैमरा लगाएंगे।
- मास रेड की विभागीय कार्यवाही में उपखंड अधिकारी या अवर अभियंता कैमरा लगाएंगे।
- यदि कैमरा सही ढंग से काम नहीं करेगा तो चेकिंग की कार्यवाही नहीं की जा सकेगी।
- बिजली चोरी मिलने पर उसकी विधिवत रिकार्डिंग कराई जाएगी।
- संयोजन विच्छेदन की कार्यवाही को भी कैमरे की देखरेख में ही किया जाएगा।
डिलीट करने को लेनी होगी अनुमति
यदि बाडी वार्न कैमरे की रिकार्डिंग को डिलीट किया जाना है तो उसके लिए संबंधित अधिकारी को मुख्य अभियंता (वितरण क्षेत्र) की लिखित अनुमति की आवश्यकता होगी।
कारपोरेशन द्वारा इस संबंध में आदेश जारी करने के साथ मानक भी निर्धारित किए हैं। विजिलेंस टीम की संपूर्ण कार्यवाही को इन कैमरों में रिकॉर्ड कराया जाएगा। नियम उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही भी की जाएगी।- मुकेश कुमार, अधीक्षण अभियंता, विद्युत। |
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