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भालुओं के डर से खाली हो गया है उत्तराखंड का यह गांव, आखिरी परिवार ने भी छोड़ा अपना घर

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प्रखंड पोखड़ा के अंतर्गत ग्रामसभा पणिया का तोकग्राम बस्ताग, जो मानवविहीन हो गया है। वहीं, बस्ताग में हरीश प्रसाद के आवास में लटके ताले। उधर परिवार के साथ हरीश प्रसाद। जागरण



रतनमणी भट्ट/मनीष खुगशाल, जागरण पाटीसैण (पौड़ी)। उत्तराखंड में सर्द मौसम में भालुओं के हमलों ने आमजन की दुश्वारियां बढ़ा रखी हैं। कोई जिला ऐसा नहीं है जहां भालू हमलावर न हो रहा हो। दहशत से जनजीवन प्रभावित है। लोगों की हिम्मत टूटती जा रही है।

पौड़ी जिले के पोखड़ा की पणिया ग्राम सभा के तोक गांव बस्ताग में एक ग्रामीण को अपना घर-बार इसलिए छोड़ना पड़ा है, क्योंकि एक सप्ताह के अंतराल में भालू ने उसके छह मवेशियों की जान ले ली। भालू अब आंगन में ही डेरा जमाए रहता है।

सुरक्षा के दृष्टिगत इस परिवार ने अपना गांव ही छोड़ दिया है। परिवार के चार सदस्यों ने पड़ोस के गांव में एक ग्रामीण के घर शरण ली है। इस परिवार के चले जाने से बस्तगा गांव वीरान हो गया है। यही एकमात्र परिवार था, जो गांव को आबाद किए हुए था।

  

यह पीड़ा वन्यजीवों के हमले से प्रभावित हरीश प्रसाद नौटियाल की है। वह दो दुधारू गाय, बैलों की जोड़ी और दो बकरियों के सहारे जीवन यापन कर रहे थे। परिवार में पत्नी जसोदा देवी, बेटा संजय और तलाकशुदा बेटी शांति हैं।

  • बस्ताग में यही परिवार था जो पांच वर्षों से गांव को आबाद किए हुए थे, लेकिन भालू ने एक सप्ताह के अंदर उनके सभी मवेशियों की जान ले ली।


इससे पूरा परिवार टूट गया, जिस हिम्मत के साथ वह गांव में डटे से वह टूट गई और घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। अब परिवार के चारों लोग पणिया गांव में नागेंद्र सिंह के मकान में रह रहे हैं।

  

नम आंखों से हरीश प्रसाद नौटियाल कहते हैं कि कभी सोचा भी नहीं था कि गांव छोड़ने का कारण भालू बनेगा। भालू ने उनकी आर्थिकी छीन ली।

अब उनके पास आर्थिक स्रोत का कोई जरिया भी नहीं रहा। जसोदा देवी ने कहा कि वन्यजीव उनके आंगन में ही आने लगे थे, जिस कारण मजबूर होकर अपना पैतृक घर छोड़ना पड़ा।
डेढ़ दशक में बदल गई गांव की तस्वीर

पणिया के ग्राम प्रधान हर्षपाल सिंह नेगी ने बताया कि बस्तगा तोक में डेढ़ दशक पूर्व तक 18 परिवार रहते थे, लेकिन सड़क आदि सुविधाएं न होने से लोग शहरों की ओर चले गए।

  

कोरोना काल में जरूर कुछ लोग गांव पहुंचे और कच्चे मकानों को पक्का किया, लेकिन फिर लौटने की जरूरत नहीं समझी। बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवार वन महकमे से भालू के आतंक से निजात दिलाने की गुहर लगाता रहा, लेकिन सुनी नहीं गई।

हर्षपाल सिंह नेगी के अनुसार पणिया में भी गुलदार व भालू की दहशत है। पोखड़ा रेंज के रेंज अधिकारी नक्षत्र शाह ने बताया कि शीघ्र ही हरीश प्रसाद के परिवार को सुरक्षा मुहैया करवाई जाएगा, ताकि ने गांव लौट जाए।
चमोली में बुजुर्ग महिला पर भालू का हमला

कर्णप्रयाग (चमोली)। सिमली में मंगलवार दोपहर भालू ने जंगल में चारापत्ती लेने गई 65 वर्षीय छुम्मा देवी पर हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। आसपास मौजूद अन्य महिलाओं ने शोर मचाकर भालू को भगाकर उसकी जान बचाई।

महिला का उपजिला चिकित्सालय कर्णप्रयाग पहुंचाया। वहां उनका इलाज चल रहा है। वन क्षेत्राधिकारी नवल किशोर ने कहा कि गांव में वन विभाग की टीम पहुंच गई है। लोगों को अकेले जंगल न जाने की सलाह दी गई है।

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