Budget 2026: अफोर्डेबल हाउसिंग, सब्सिडी से टैक्स रिलीफ तक, पहली बार घर खरीदने वालों को मिल सकती हैं 10 बड़ी राहतें?
नई दिल्ली| अपना घर…ये सुनने में तो सिर्फ दो शब्द हैं। लेकिन महसूस करें तो ये हर आम इंसान की ज़िंदगी का सबसे बड़ा सपना है। लेकिन सच ये भी है कि बढ़ती महंगाई, ऊंची ब्याज दरें और आसमान छूती प्रॉपर्टी की कीमतें इस सपने को हर साल थोड़ा और दूर धकेल देती हैं। ऐसे में जब देश का बजट आने वाला हो, तो उम्मीदें फिर से जाग जाती हैं। लोग सोचते हैं कि शायद इस बार कुछ बदले। शायद इस बार घर लेना थोड़ा आसान हो जाए। और बजट 2026 (Union Budget 2026) में सवाल सिर्फ टैक्स बचत का नहीं है।
सवाल है- क्या मिडिल क्लास का अपना घर अब भी मुमकिन है? या फिर ये सपना और महंगा होने वाला है? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए जागरण बिजनेस ने रियल एस्टेट इंडस्ट्री के अनुभवी एक्सपर्ट और ओराम ग्रुप के फाउंडर प्रदीप मिश्रा से बात की। उन्होंने बातचीत के दौरान बताया कि बजट 2026 से आम आदमी को क्या-क्या राहत (budget expectations 2026) मिल सकती है?
सवाल-1: Budget 2026 से Real Estate सेक्टर को क्या उम्मीदें हैं?
जवाबः रियल एस्टेट सेक्टर को बजट 2026 से तीन बड़ी राहतों की उम्मीद है। पहली-अफोर्डेबल हाउसिंग (Affordable Housing) को दोबारा रफ्तार देना। दूसरी- होमबायर्स (Homebuyers) और निवेशकों (Investors) के लिए टैक्स में राहत। और तीसरी- इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को और मजबूत करना।
आज की स्थिति यह है कि लग्जरी हाइसिंग (Luxury Housing) अच्छा प्रदर्शन कर रही है, लेकिन अफोर्डेबल और मिड-इनकम हाउसिंग कमजोर पड़ती जा रही है। अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले समय में बाजार में बड़ा असंतुलन पैदा हो सकता है। इसी वजह से बजट 2026 को \“डायरेक्शन सेटिंग बजट\“ कहा जा रहा है।
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सवाल-2: अफोर्डेबल हाउसिंग इतना बड़ा मुद्दा क्यों बन गया है?
जवाबः अफोर्डेबल हाउसिंग की सबसे बड़ी समस्या है- जमीन के दाम और निर्माण लागत का लगातार बढ़ना। शहरों में जमीन इतनी महंगी हो चुकी है कि बिल्डर्स के लिए सस्ते घर बनाना फायदे का सौदा नहीं रह गया। नतीजा यह है कि डेवलपर्स लग्जरी और प्रीमियम प्रोजेक्ट पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।
इसका सीधा असर मिडिल क्लास और पहली बार घर खदीने वालों (first-time buyers) पर पड़ रहा है, जिनके लिए अब घर खरीदना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है। इंडस्ट्री चाहती है कि बजट 2026 में ऐसी नीतियां आएं, जिससे affordable segment दोबारा attractive बन सके।
सवाल-3: अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा बदलने की जरूरत क्यों है?
जवाबः सरकार ने अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए जो कीमत तय कर रखी हैं, वे आज की मार्केट रिएलिटी से मेल नहीं खातीं। Delhi-NCR, मुंबई जैसे बड़े शहरों में उन लिमिट्स के भीतर घर बनाना लगभग नामुमकिन हो चुका है।
इंडस्ट्री की मांग है कि अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा को बदला जाए, ताकि आज के समय में जो घर वाकई अफोर्डेबल माने जा सकते हैं, वे सरकारी लाभों के दायरे में आ सकें। इससे बिल्डर्स को भी इस सेगमेंट में लौटने का प्रोत्साहन मिलेगा।
सवाल-4: हाउसिंग सब्सिडी को लेकर क्या उम्मीदें हैं?
जवाबः क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (Credit Linked Subsidy Scheme) जैसी योजनाओं को दोबारा मजबूत करने की मांग है। खासतौर पर पहली बार खरीदने वालों को और मिडिल इनकम बायर्स के लिए इंटरेस्ट सब्सिडी आज बेहद जरूरी हो गई है।
जब घर की कीमतें और EMIs दोनों बढ़ रही हों, तब सब्सिडी ही डिमांड को सपोर्ट करने का सबसे प्रैक्टिकल तरीका बनती है। Budget 2026 में अगर सब्सिडी का दायरा बढ़ाया गया, तो इसका सीधा फायदा आम खरीदारों को मिलेगा।
सवाल-5: घर खदीदने वालों के लिए Tax Relief क्यों जरूरी है?
जवाब: होम लोन इंटरेस्ट (Home loan interest) पर मिलने वाली ₹2 लाख की टैक्स डिडक्शन लिमिट (tax deduction limit) अब आउटडेटेड मानी जा रही है। आज घर महंगे हैं, लोन बड़े हैं, लेकिन टैक्स बेनिफिट वही पुराना है।
इंडस्ट्री चाहती है कि इस लिमिट को बढ़ाया जाए, साथ ही प्रिंसिपल री-पेमेंट (principal repayment) पर भी बेहतर टैक्स राहत मिले। अंडर कंट्रक्शन प्रोपर्टी (Under-construction property) पर GST को rationalise करने की भी उम्मीद है, ताकि लोग बेहिचक घर खरीदने का फैसला कर सकें।
सवाल-6: निवेशकों और कैपिटल गेन टैक्स में बदलाव क्यों अहम है?
जवाबः रियल एस्टेट में निवेश करने वालों के लिए कैपिटल गेन टैक्स (capital gains tax) और होल्डिंग पीरियड (holding period) को सरल बनाने की मांग है। जटिल टैक्स नियम असली निवेशकों को हतोत्साहित करते हैं।
अगर टैक्सेशन आसान और स्पष्ट होगा, तो लॉन्ग टर्म और ऑर्गनाइज्ड इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा, जिससे सेक्टर को स्टेबिलिटी मिलेगी। NRIs के लिए TDS मानदंड को भी आसान करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
सवाल-7: स्टॉल्ड प्रोजक्ट्स क्यों बड़ी समस्या बन चुके हैं?
जवाबः देश में हजारों हाउसिंग प्रोजेक्ट्स (housing projects) अटके हुए हैं, जिनमें खरीदारों का पैसा फंसा है। ऐसे प्रोजेक्ट्स सेक्टर की विश्वसनीयता (credibility) को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं।(Special Window for Affordable and Mid-Income Housing)
स्पेशन विंडो फॉर अफोर्डेबल एंड मिड-इनकम हाउसिंग (SWAMIH Fund) जैसी स्कीम को और बड़ा करने की मांग इसलिए है, ताकि अटके हुए प्रोजेक्ट्स को लास्ट माइल फंडिंग मिल सके और वे पूरे हो सकें। इससे buyers का भरोसा लौटेगा और बाजार में liquidity भी सुधरेगी।
सवाल-8: इन्फ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट का क्या रिश्ता है?
जवाबः इन्फ्रास्ट्रक्चर ही रियल एस्टेट ग्रोथ की असली नींव है। एक्सप्रेसवे, मेट्रो, एयरपोर्ट्स और रेलवे प्रोजेक्ट्स नए इलाकों को रहने लायक बनाते हैं और पुराने शहरों पर दबाव कम करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में सरकार का इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर रियल एस्टेट के लिए बड़ा उत्प्रेरक (catalyst) साबित हुआ है। बिना मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर के बैलेंस्ड हाउसिंग ग्रोथ संभव नहीं है।
सवाल-9: बजट 2026 को हाउसिंग के लिए Make-or-Break क्यों कहा जा रहा है?
जवाब: क्योंकि आज लग्जरी और अफोर्डेबल हाउसिंग के बीच की खाई तेजी से बढ़ रही है। अगर इस गैप को अभी पॉलिसी रिफॉर्म, टैक्स रिलीफ और सब्सिडी के जरिए नहीं पाटा गया, तो आने वाले समय में घर आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकता है।
बजट 2026 सरकार के पास वह मौका है, जिससे वह हाउसिंग को सिर्फ प्रीमियम बायर्स (premium buyers) तक सीमित न रखकर, आम लोगों के लिए भी सुलभ बना सकती है।
सवाल-10: पॉलिसीज़ और अप्रूवल्स को लेकर क्या सुधार किया जा सकते हैं?
जवाबः डेवलपर्स सिंगल-विंडो क्लियरेंस सिस्टम (single-window clearance system) और तेजी से स्वीकृतियों की उम्मीद कर रहे हैं। देरी और जटिल अनुमतियों परियोजना लागत (complex permissions project cost) बढ़ा देती हैं, जिसका बोझ आखिरकार खरीदार पर आता है। अगर अप्रूवल सरल और तेज होंगे तो प्रोजेक्ट् समय पर पूरे होंगे और हाउसिंग ज्यादा अफोर्डेबल बनेगी। |