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झारखंड में ACB की बड़ी कार्रवाई, हजारीबाग वन भूमि घोटाले में 8 आरोपितों को किया गिरफ्तार

LHC0088 2025-12-7 04:08:08 views 1026
  

आरोपितों को गिरफ्तार कर लेकर जाती एसीबी की टीम। (जागरण)  



संवाद सूत्र, हजारीबाग। सरकारी वन एवं भूदान श्रेणी की जमीनों की अवैध बिक्री मामले में एसीबी की जांच का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। जिस तरह के जांच चल रही है, इससे कई माननीयों का मुश्किलें बढ़ सकती है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

ताजा मामला जुड़े बहुचर्चित वन भूमि घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज 11 -25 का है। इसी क्रम में शनिवार को एसीबी ने हजारीबाग से 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। उनसे कई घंटे तक गहन पूछताछ के बाद उनकी गिरफ्तारी की गई है।

सूत्रों के अनुसार देर रात तक कुछ और लोगों को भी हिरासत में लिए जाने की संभावना बनी हुई है। यह घोटाले में अब तक की सबसे बड़ी और एक साथ की गई कार्रवाई मानी जा रही है।

गिरफ्तार आरोपितों में बक्सपुरा निवासी हाजी कलन, शिवपुरी निवासी जय प्रकाश यादव, मुकुंदगंज के प्रेम साव, इंद्र साव (राहुल हार्डवेयर), बभनवै के शशि शेखर और संजय, मुकुंदगंज निवासी सत्यनारायण साव और छत्रु प्रजापति गिरफ्तार कर लिया है।
पूरे दिन हुई पूछताछ

जानकारी के अनुसार इन सभी को पहले एसीबी कार्यालय ले जाया गया, फिर ठिकाना बदलकर उनसे करीब पूरे दिन पूछताछ हुई। शहर में दिनभर छापेमारी और पूछताछ को लेकर अफरा–तफरी और चर्चा का माहौल बना रहा।
इस कार्रवाई से ठीक पहले दो दिनों तक एसीबी ने जेल में बंद तत्कालीन उपायुक्त आईएएस विनय चौबे से पूछताछ की थी।

पूछताछ के बाद ही कार्रवाई तेज कर नौ लोगों को डिटेन किया गया। मालूम हो कि इस मामले में निलंबित आईएएस विनय चौबे, कारोबारी विनय सिंह और तत्कालीन अंचल अधिकारी शैलेश कुमार पहले से ही जेल में बंद है। वहीं, अंचल अधिकारी अलका कुमारी सरकारी गवाह बन चुकी हैं।

पूरे मामले में दर्ज भ्रष्टाचार निवारण वाद संख्या 11/2025 में कुल 73 आरोपित बनाए गए, जिनमें से 68 नामजद हैं। मुकदमा 25 सितंबर 2025 को दर्ज हुआ था। एफआईआर में आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 120(बी) एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) व 13(2) शामिल हैं।
और भी नाम आ सकते हैं सामने

आरोप है कि सरकारी भूदान, वन भूमि, गोचर, गैर–मजरूआ आम और खास भूमि को फर्जी कागजात तैयार कर भूमाफियाओं ने खरीद-बिक्री कर जमाबंदी करा लिया था। इस पूरे घोटाले की शुरुआत पत्रकार त्रिपुरारी सिंह द्वारा मुख्यमंत्री को दी गई शिकायत के बाद हुई।

मामले के सूचक एसीबी डीएसपी सुमित सौरभ लकड़ा हैं। अब एसीबी की टीम घोटाले से जुड़े सभी भूमि दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच की तैयारी में जुटी है। जांच विस्तार की ओर बढ़ रही है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी नाम सामने आ सकते हैं।
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