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जेब पर भारी नहीं होगा विदेशी शौक! BMW से फ्रेंच वाइन तक सब होगा सस्ता, देखें पूरी लिस्ट

deltin55 The day before yesterday 00:22 views 34

               
भारत और यूरोपीय यूनियन ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर मंगलवार को हस्ताक्षर किए जिसे अबतक का सबसे बड़ा समझौता बताया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय यूनियन के शीर्ष नेतृत्व ने व्यापार एवं रक्षा क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करने और नियम-आधारित विश्व व्यवस्था की दिशा में काम करने के लिए एक व्यापक एजेंडा पेश किया. प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय यूनियन के नेताओं उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा की मेजबानी की.


इसके बाद दोनों पक्षों ने सुरक्षा व रक्षा सहयोग और यूरोप में भारतीय प्रतिभाओं की आवाजाही से जुड़े दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए. नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के अपने दृष्टिकोण के अनुरूप, भारत और 27 देशों के समूह ने अगले पांच वर्षों के लिए एक संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडा पेश किया. मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए वार्ता के समापन सहित कुल 13 समझौतों को अंतिम रूप दिया.






एक अधिकारी ने बताया कि इस समझौते के तहत परिधान, रसायन और जूते-चप्पल जैसे कई घरेलू क्षेत्रों को 27 देशों के इस समूह में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा. वहीं, यूरोपीय संघ (ईयू) को कार और वाइन के लिए रियायती शुल्क पर भारतीय बाजार तक पहुंच प्राप्त होगी. अधिकारी ने कहा कि वाहन और इस्पात को छोड़कर, भारत के लगभग सभी सामानों (93 प्रतिशत से अधिक) को यूरोपीय यूनियन में शून्य-शुल्क पहुंच मिलेगी.

        

बाकी छह प्रतिशत से अधिक वस्तुओं के लिए भारतीय निर्यातकों को शुल्क में कटौती और कोटा-आधारित शुल्क रियायतें (जैसे ऑटोमोबाइल के लिए) मिलेंगी. दूसरी ओर, यूरोपीय यूनियन को भारत में दस वर्षों की अवधि में अपने 93 फीसदी सामानों के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी. भारत समझौते को लागू करने के पहले दिन यूरोपीय वस्तुओं के केवल 30 प्रतिशत हिस्से पर शुल्क हटाएगा.


भारत यूरोपीय संघ को व्यापार मूल्य के 3.7 प्रतिशत हिस्से पर शुल्क रियायतें और कोटा-आधारित कटौती भी दे रहा है. कुल मिलाकर, भारत ईयू को व्यापार मूल्य के 97.5 प्रतिशत पर शुल्क रियायतें दे रहा है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर भारत में कौन से यूरोपीय सामान सस्ते हो रहे हैं.



वाइन: लागू होने पर आयात शुल्क 150 फीसदी से घटाकर 75 फीसदी कर दिया जाएगा, और अंततः प्रीमियम शराब पर शुल्क घटकर 20 फीसदी और मिड कैटेगिरी की शराब पर 30 फीसदी तक हो जाएगा, जिससे भारत में यूरोपीय शराब काफी सस्ती हो जाएगी.
स्पिरिट: 150 फीसदी तक के शुल्क को घटाकर 40 फीसदी कर दिया जाएगा, जिससे आयातित स्पिरिट की लागत कम हो जाएगी.
बीयर: आयात शुल्क 110 फीसदी से घटाकर 50 फीसदी कर दिया जाएगा, जिससे यूरोपीय बीयर ब्रांडों की कीमतें कम हो जाएंगी.
जैतून का तेल, मार्जरीन और अन्य वनस्पति तेल: 45 फीसदी तक के शुल्क को पांच वर्षों में पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा, जिससे इन आवश्यक आयातित वस्तुओं की कीमतों में भारी कमी आएगी.
प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स (ब्रेड, पेस्ट्री, बिस्कुट, पास्ता, चॉकलेट, पालतू पशु आहार): 50 फीसदी तक के हाई टैरिफ को पूरी तरह से हटा दिया जाएगा, जिससे इनकी सामर्थ्य और उपलब्धता में सुधार होगा.
फलों के रस और नॉन-अल्कोहल वाली बीयर: आयात शुल्क में 55 फीसदी तक की कटौती करके इसे शून्य कर दिया जाएगा, जिससे ये उत्पाद उपभोक्ताओं के लिए सस्ते हो जाएंगे.
कीवी और नाशपाती: 33 फीसदी का शुल्क निर्धारित कोटा के भीतर घटकर 10 फीसदी हो जाएगा, जिससे आयातित फलों की कीमतें कम होंगी.
एग्री-फूड प्रोडक्ट: भारत को यूरोपीय कृषि-खाद्य निर्यात पर लगने वाला औसत शुल्क 36 फीसदी से अधिक या तो हटा दिया जाएगा या काफी कम कर दिया जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं के लिए विकल्प बढ़ेंगे.
मोती, कीमती पत्थर और मेटल्स: 20 फीसदी उत्पादों पर 22.5 फीसदी तक का शुल्क समाप्त कर दिया जाएगा, जबकि अन्य 36 फीसदी पर शुल्क कम कर दिया जाएगा, जिससे आभूषण और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा होगा.
कार: 250,000 वाहनों के कोटा के तहत 110 फीसदी का आयात शुल्क घटाकर 10 फीसदी कर दिया जाएगा, जिससे चुनिंदा आयातित मॉडलों की कीमतें संभावित रूप से कम हो जाएंगी.
दवाएं: लगभग सभी उत्पादों पर लगने वाला लगभग 11 फीसदी का शुल्क हटा दिया जाएगा, जिससे यूरोपीय दवाओं तक पहुंच में सुधार होगा.
भेड़ का मांस: 33 फीसदी का शुल्क पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा, जिससे आयातित मांस उत्पादों की लागत कम हो जाएगी.
सॉसेज और अन्य मांस उत्पादों पर लगने वाले 110 फीसदी तक के उच्च शुल्क को घटाकर 50 फीसदी कर दिया जाएगा, जिससे आयात कीमतों में कमी आएगी.
लग्जरी कारें: आयातित कारों पर लगने वाले शुल्क को धीरे-धीरे 110 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी तक कर दिया जाएगा, जबकि ऑटो पुर्जों पर लगने वाले शुल्क को अगले पांच से दस वर्षों में पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा.


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