भारत का मीडिया और प्रसारण क्षेत्र इस समय एक निर्णायक बदलाव के चरण में है। पारंपरिक ब्रॉडकास्ट मॉडल से आगे निकलते हुए यह सेक्टर अब AI-आधारित और डिजिटल तकनीकों को केंद्र में रखकर अपने भविष्य की दिशा तय कर रहा है। इस बदलते परिदृश्य की झलक BES एक्सपो 2026 में साफ तौर पर देखने को मिली।
BES एक्सपो 2026 ने दिखाया भविष्य का रोडमैप

BES एक्सपो 2026 के दौरान सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने कहा कि भारतीय ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर अब केवल तकनीकी बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक मीडिया व्यवस्था में नेतृत्व की भूमिका निभाने की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘भारत में बनाया गया, दुनिया के लिए बनाया गया’ विज़न का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय कंटेंट और टेक्नोलॉजी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहे हैं।
ब्रॉडकास्टिंग का सफर: पारंपरिक से AI-आधारित मॉडल तक
मंत्री के अनुसार भारत का प्रसारण तंत्र रेडियो और टीवी जैसे पारंपरिक माध्यमों से विकसित होकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और अब AI-सपोर्टेड मीडिया इकोसिस्टम में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि मीडिया न सिर्फ सूचना का माध्यम है, बल्कि समावेशी विकास का ऐसा उपकरण है, जो समाज के अंतिम पायदान तक अवसर पहुंचाने में सक्षम है।
डिजिटल FM की ओर बढ़ता रेडियो सेक्टर
एक्सपो में हुई चर्चाओं से यह संकेत मिला कि भारत का FM रेडियो सेक्टर अब डिजिटल बदलाव के करीब है। ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री ने HD Radio को एक भरोसेमंद, स्केलेबल और भविष्य के अनुकूल तकनीक के रूप में देखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक मौजूदा FM ढांचे के साथ आसानी से जोड़ी जा सकती है, जिससे श्रोताओं को बेहतर अनुभव मिलेगा।
डिवाइस इकोसिस्टम से मिल रहा समर्थन
डिजिटल रेडियो को लेकर डिवाइस निर्माताओं का रुख भी सकारात्मक नजर आया। स्मार्टफोन, फीचर फोन, ब्लूटूथ स्पीकर्स और ऑटोमोबाइल्स में डिजिटल रेडियो रिसीवर को शामिल करने पर सहमति जताई गई, हालांकि इसके लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से स्पष्ट नीतिगत दिशा को जरूरी बताया गया।
AI को लेकर सकारात्मक सोच
नीति सत्र में सूचना एवं प्रसारण सचिव संजय जाजू ने कहा कि AI को लेकर अनावश्यक आशंकाएं हैं, जबकि इसका वास्तविक प्रभाव कहीं अधिक व्यापक और उपयोगी है। उन्होंने बताया कि AI की मदद से मीडिया प्रोडक्शन पहले की तुलना में अधिक तेज, कम लागत वाला और प्रभावी बन रहा है। उनका मानना है कि AI को चुनौती नहीं, बल्कि सहयोगी तकनीक के रूप में देखा जाना चाहिए।
डिजिटल सुधारों से आसान होगा कारोबार
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