भारत का स्टार्टअप ईकोसिस्टम (Startup Ecosystem) तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी चीन की तुलना में हम काफी पीछे हैं. बात भले ही इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर की हो, रोबोटिक्स की हो या फिर सेमीकंडक्टर की हो.. टेक्नोलॉजी के मामले में चीन हमसे आगे है. भारत और चीन की तुलना करने वाली एक पोस्ट इन दिनों सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है. आइए समझते हैं आखिर टेक्नोलॉजी में चीन हमसे आगे क्यों है?

Tracxn के आंकड़ों के मुताबिक भारत में करीब 1800 ऐसे स्टार्टअप हैं, जो इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में काम कर रहे हैं. वहीं अगर बात चीन की करें तो वहां भी यह आंकड़ा 1700 स्टार्टअप्स के करीब है. यानी स्टार्टअप की संख्या के मामले में तो भारत आगे है, लेकिन चीन में इलेक्ट्रिस व्हीकल स्टार्टअप्स तेजी से काम कर रहे हैं.
इलेक्ट्रिक व्हीकल में सबसे अहम होती है उसकी बैटरी, जिसे बनाने में लीथियम एक अहम योगदान देता है. चीन में अगर लीथियम के भंडार की बात करें तो वहां दुनिया का करीब 16 फीसदी लीथियम है. लीथियम भंडार के मामले में चीन दुनिया में दूसरे नंबर पर है. बता दें कि चिली में लीथियम का सबसे बड़ा भंडार है. वहीं अगर भारत की बात करें तो हम लीथियम आयन बैटरी के लिए चीन पर बहुत ज्यादा निर्भर है. भारत अपनी कुल लीथियम आयन बैटरी की जरूरत का करीब 75 फीसदी तो सिर्फ चीन से ही आयात करता है. यहां तक कि इकनॉमिक सर्वे में भी इस पर चिंता जताई गई थी.
अगर ट्रैक्शन की रिपोर्ट को देखें तो पता चलता है कि भारत में अभी करीब 129 ऐसे स्टार्टअप हैं, जो सेमीकंडक्टर सेक्टर में काम कर रहे हैं. वहीं चीन में इन स्टार्टअप्स की संख्या करीब 246 है. यानी सेमीकंडक्टर के मामले में चीन हमसे काफी आगे है. यही वजह है कि जब कोरोना काल में आयात-निर्यात बंद हुआ था, तो भारत में सेमीकंडक्टर की किल्लत हो गई थी, क्योंकि हम इसके लिए पूरी तरह से आयात पर ही निर्भर थे. यही वजह है कि अब सरकार भी Semicon India और India Semiconductor Mission के जरिए भारत में सेमीकंडक्टर्स बनाने के लिए स्टार्टअप्स और कंपनियों को प्रमोट कर रही है.
अगर बात रोबोटिक्स और ऑटोमेशन की करें तो ट्रैक्शन के अनुसार इस फील्ड में भारत और चीन में लगभग बराबर-बराबर ही स्टार्टअप हैं. दोनों ही जगह करीब 250-250 स्टार्टअप हैं. हालांकि, चीन में रोबोटिक्स पर फोकस बहुत ज्यादा है, जिसके चलते जब भी रोबोटिक्स की बात होती है तो चीन का नाम जरूर आता है. चीन 2025 तक ग्लोबल इनोवेशन हब बनना चाहता है और 2035 तक ग्लोबल लीडर बननेकी तैयारी कर रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन के पास रोबोट से जुड़े करीब 1.90 लाख पेटेंट हैं, जो पूरी दुनिया के रोबोट पेटेंट्स का करीब दो-तिहाई है.
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