हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के संपदा अधिकारी ने अतिक्रमण हटाए जाने की रिपोर्ट प्रस्तुत की जबकि हकीकत उजागर कर रही तस्वीरें। जागरण
जागरण संवाददाता, बादशाहपुर। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने सेक्टर-57 में लंबे समय से अवैध अतिक्रमण और आवासीय क्षेत्र में भवन निर्माण सामग्री के मामले में सख्त रुख अपनाया है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने इस मामले में पुलिस और संबंधित विभागों को ठोस, समयबद्ध और स्थायी समाधान करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने फैसला सेक्टर-57 के रोशन लाल की शिकायत पर दिया है।
आयोग के सामने सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों में विरोधाभास है। एक ओर पुलिस रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया कि स्थल पर अब भी अवैध रूप से भवन निर्माण सामग्री की आपूर्ति और भंडारण की गतिविधियां जारी हैं। दूसरी ओर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के संपदा अधिकारी ने अतिक्रमण हटाए जाने की रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस पर न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने सवाल उठाया कि यदि अवैध गतिविधियां अभी भी हो रही हैं। तो सेक्टर-57 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा अतिक्रमण हटाए जाने की सराहना करते हुए प्रशंसा पत्र क्यों जारी किए गए।
आयोग ने पुलिस उपायुक्त (पूर्व) को निर्देश दिए कि वे स्वयं स्थल का निरीक्षण करें। अतिक्रमण को स्थायी रूप से हटाने के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। संबंधित सभी एफआईआर तथा निरीक्षण की प्रगति रिपोर्ट आयोग के सामने पेश करें।
वहीं एचएसवीपी को निर्देश दिए गए कि स्थल पर 8 से 10 फीट ऊंची आरसीसी व सीसी बाउंड्री वाल, लोहे की ग्रिल या फेंसिंग, चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टिव साइन, सीसीटीवी कैमरे, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था स्थापित किए जाएं। स्थानीय पुलिस के साथ नियमित गश्त भी अनिवार्य की गई है।
सहायक रजिस्ट्रार डाॅ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि आयोग ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण नागरिकों के सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समन्वय से कार्य कर स्थायी समाधान करें। अगली सुनवाई 18 मार्च से एक सप्ताह पूर्व अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
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