संवाद सूत्र, सीतापुर। राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में शुक्रवार शाम जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. और पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल समेत पूरा प्रशासनिक अमला व पुलिसकर्मी उपस्थित थे। इस दौरान करीब छह बजे सायरन बजने लगता है। कुछ ही देर में धमाकों से परिसर गूंज उठता है। जगह-जगह आग लग जाती है। सुरक्षा कर्मियों और सिविल डिफेंस के सदस्यों के साथ डीएम व एसपी राहत-बचाव के लिए दौड़ पड़ते हैं। यह दृश्य गणतंत्र दिवस को लेकर आयोजित मॉक ड्रिल के हैं।
मॉक ड्रिल में बताया गया कि किस तरह से आपातकालीन स्थितियों से निपटना है। आग लगने पर घायलों को निकालने, उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, आत्मरक्षा, चिकित्सीय सहायता आदि के संबंध में पुलिस एवं दमकल कर्मियों ने संयुक्त गतिविधियां कीं। वहीं, प्रतीकात्मक घायलों को एंबुलेंस के माध्यम से जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया। इसके लिए ग्रीन कारीडोर बनाया गया। माक ड्रिल में एनसीसी और एनएसएस कैडेट ने भी प्रतिभाग किया।
‘अपातकालीन स्थितियों में धैर्य को बनाएं हथियार’
जिलाधिकारी ने बताया कि आपातकालीन स्थितियों में धैर्य सबसे बड़ा हथियार होता है। विवेकपूर्ण तरीके से त्वरित निर्णय लेकर स्थितियों का सामना करना चाहिए। बताया, अफवाहें ऐसी स्थितियों में विष के समान काम करती हैं। अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। किसी सूचना को तर्क और साक्ष्यों की कसौटी पर परखना चाहिए। पुलिस अधीक्षक ने बताया आपात परिस्थितियों में शांत रहने का प्रयास करें, घबराहट से बचें और दूसरों को भी शांत रहने के लिए प्रेरित करें। आपातकालीन परिस्थितियों प्रशासन और पुलिस की सभी इकाइयां सक्रिय हो जाती हैं। माक ड्रिल में इनकी कार्यशैली दिखाने का प्रयास किया है।
सिर झुकाकर गर्दन को ढकें
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गर्दन और सिर शरीर के सबसे अहम हिस्सा होते हैं। हमले की स्थिति में इन्हें बचाने का पूरा प्रयास करना चाहिए। बताया, हमले की चेतावनी को गंभीरता से लें तथा मजबूत संरचना वाले स्थान में शरण लें। हमले की आवाज सुनते ही जमीन पर लेट जाए, चेहरे को नीचे करें, सिर और गर्दन को हाथों, बैग, किताब या किसी वस्तु से ढकें। बिजली, गैस और पानी की सप्लाई बंद रखें। |
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